असम विधानसभा (Assam Assembly) को सोमवार को जानकारी दी गई कि पिछले साल मई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत सरकार के प्रभार संभालने के बाद से कथित अतिक्रमण को लेकर राज्य में कुल 4,449 परिवारों को इस जमीन से हटाया गया।

असम विधानसभा (Assam Assembly) को सोमवार को जानकारी दी गई कि पिछले साल मई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत सरकार के प्रभार संभालने के बाद से कथित अतिक्रमण को लेकर राज्य में कुल 4,449 परिवारों को इस जमीन से हटाया गया।
यह पूछे जाने पर कि हटाए गए परिवार भारतीय थे या विदेशी, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि सरकार ने उनकी नागरिकता की कोई जांच नहीं की है। बांग्लादेश की सीमा से लगे पूर्वोत्तर के इस राज्य में अवैध प्रवास का आरोप राजनीतिक विमर्श का एक अहम हिस्सा है।
कांग्रेस के विधायक शेरमन अली अहमद के एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि नई सरकार ने अब तक 4,449 परिवारों को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस बात से भी अवगत नहीं है कि क्या सरकारी जमीन का अतिक्रमण करने वाले ये लोग भू-क्षरण के कारण बेघर हुए थे।
3 लाख मामूली आपराधिक मुकदमों को वापस लेगी असम सरकार
असम सरकार के एक मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मामूली अपराधों में दर्ज करीब तीन लाख मुकदमों को रविवार को वापस लेने का फैसला किया, ताकि न्यायपालिका पर से मुकदमों का बोझ कम हो सके। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फेंस को संबोधित करते हुए असम के पर्यटन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने कहा कि पूरे राज्य में अदालतों में लाखों मुकदमे लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि हमने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा-321 का इस्तेमाल करते हुए करीब 4.19 लाख मामूली आपराधिक मामलों में से तीन लाख मुकदमों को वापस लेने का फैसला किया है। इससे न्यायालयों पर से मुकदमों का बोझ कम होगा और जेलों में कैदियों की भीड़ घटाने में भी मदद मिलेगी।
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