इस साल पड़ेगी कड़ाके की ठंड, आखिर क्या बला हैं ये अल नीनो और ला नीना, जो बदल सकते हैं पूरी दुनिया का मौसम
India Weather: 2 सितंबर, 2024 को IMD की घोषणा ने ला नीना के कारण भीषण सर्दी की संभावना की पुष्टि की। ठंडे मौसम और ज्यादा बारिश दोनों के साथ होने से भी कृषि पर असर पड़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जो सर्दियों की फसलों पर निर्भर हैं। आने वाली सर्दी बेशक भारत भर में कई लोगों के लिए चुनौती होने वाली है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में
इस बार भारत में क्यों पड़ेगी बहुत ज्यादा ठंड, आखिर क्या बला हैं ये अल नीनो और ला नीना
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल देशभर में बहुत ज्यादा सर्दी पड़ने का अनुमान जताया है। इसे ला नीना की शुरुआत माना जा रहा है। 2 सितंबर, 2024 को IMD की घोषणा ने ला नीना के कारण भीषण सर्दी की संभावना की पुष्टि की। ला नीना एक ऐसा मौसम पैटर्न है, जिसमें इक्वेटोरियल पैसिफिक में समुद्र की सतह का औसत से ज्यादा ठंडे तापमान हो जाता है। इसमें तापमान में काफी कमी और बारिश की उम्मीद बढ़ जाती है।
ये पैटर्न आम तौर पर अप्रैल और जून के बीच शुरू होता है। तेज पूर्वी हवाओं ये स्थिति पैदा होती है, जो समुद्र के पानी को पश्चिम की ओर धकेलती है, जिससे समुद्र की सतह ठंडी हो जाती है।
क्या होता है ला नीना?
ला नीना अल नीनो के उलट एक प्राकृतिक मौसम पैटर्न है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र का तापमान सामान्य से कम ठंडा होता है। ये पैटर्न पूरी दुनिया में मौसम पर असर डाल सकता है, लेकिन इसका असर अल नीनो के उनट होते हैं। अल नीनो क्या होता है, ये हम आपको आगे बताएंगे।
ला नीना के दौरान, प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र का तापमान सामान्य से कम ठंडा होता है, जिससे वायुमंडलीय दबाव और हवाओं में बदलाव होता है। यह बदलाव मौसम पैटर्न को बदल देता है, जिससे ये प्रभाव हो सकते हैं:
1. सूखा और जल संकट
2. भारी बारिश और बाढ़ (कुछ इलाकों में)
3. तापमान में बदलाव
4. तूफान और चक्रवात की कम संख्या
5. कृषि और खाद्य उत्पादन पर प्रभाव
क्या होता है अल नीनो?
अल नीनो के दौरान, प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म होता है। यह परिवर्तन वायुमंडलीय दबाव और हवाओं को प्रभावित करता है, जिससे मौसम पैटर्न बदल जाते हैं।
ला नीना और अल नीनो दोनों प्राकृतिक मौसम पैटर्न हैं, जो प्रशांत महासागर में होते हैं और पूरी दुनिया में मौसम को प्रभावित कर सकते हैं। इन पैटर्न की मौसम विज्ञानिक निगरानी करते हैं, ताकि वे मौसम की भविष्यवाणी कर सकें और संबंधित क्षेत्रों में तैयारी कर सकें।
भारत के इन राज्यों में पड़ सकती है भीषण ठंड
आने वाली सर्दी हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे उत्तरी राज्यों में खासतौर से गंभीर होने का अनुमान है, जहां तापमान संभावित रूप से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।
ठंडे मौसम और ज्यादा बारिश दोनों के साथ होने से भी कृषि पर असर पड़ सकता है, खासकर उन इलाकों में जो सर्दियों की फसलों पर निर्भर हैं।
कठोर परिस्थितियों की तैयारी में, IMD ने नागरिकों से जरूरी सावधानी बरतने की अपील की है, जिसमें पर्याप्त हीटिंग सुनिश्चित करना, जरूरी सप्लाई का स्टॉक करना और मौसम की रिपोर्ट पर नजर रखना शामिल है। सरकार से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वह प्रभाव को कम करने के लिए उपाय लागू करेगी, खासतौर से कमजोर इलाकों में।
पहले से जारी है ला नीना का असर
ला नीना का असर पहले से ही महसूस किया जा रहा है, 2024 का मानसून सीजन आमतौर पर सितंबर में खत्म हो जाना था, लेकिन अब तक जारी है। मानसून के देरी से पीछे हटने का संबंध समुद्र के ठंडा होने से है, जिसने सामान्य मौसम पैटर्न में रुकावट ला दी है, जिससे भारी बारिश हुई है, खासकर दक्षिणी और मध्य भारत में।
IMD स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और अपडेट और एडवाइज जारी करता रहेगा। उनकी भविष्यवाणियां समुद्र के तापमान, हवा के पैटर्न और ऐतिहासिक जलवायु रुझानों सहित डेटा के विश्लेषण पर आधारित हैं।
आने वाली सर्दी बेशक भारत भर में कई लोगों के लिए चुनौती होने वाली है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में। हालांकि, समय पर तैयारी और सटीक जानकारी से इसके असर को कम और कंट्रोल किया जा सकता है।