जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2021 (Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021) शनिवार को लोकसभा से पास हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने शनिवार को लोकसभा में कहा कि जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक का राज्य के दर्जे से कोई संबंध नहीं है और उपयुक्त समय आने पर जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाएगा। लोकसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2021 पर चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि इस विधेयक में ऐसा कहीं भी नहीं लिखा है कि इससे जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा नहीं मिलेगा।
गृह मंत्री ने कहा कि मैं फिर से कहता हूं कि इस विधेयक का जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे से कोई संबंध नहीं है। उपयुक्त समय पर प्रदेश को राज्य का दर्जा दिया जाएगा। 4G इंटरनेट सुविधाएं दबाव में बहाल करने के आरोप पर जवाब देते हुए शाह ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी जी ने कहा कि 2जी से 4जी इंटरनेट सेवा को विदेशियों के दबाव में लागू किया है। उन्हें पता नहीं है कि यह UPA सरकार नहीं, जिसका वह समर्थन करते थे। यह नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो देश के लिए फैसले करती है।
उन्होंने कहा कि यहां कहा गया कि आर्टिकल 370 हटाने के वक्त जो वादे किए गए थे, उनका क्या हुआ? मैं उसका जवाब जरूर दूंगा लेकिन पूछना चाहता हूं कि अभी तो आर्टिकल 370 को हटे हुए केवल 17 महीने हुए हैं, आपने 70 साल क्या किया उसका हिसाब लेकर आए हो क्या? उन्होंने कहा कि किसके दबाव में धारा 370 को इतने समय तक चालू रखा? आप 17 महीने में हिसाब मांगते हो, 70 साल तक जब अस्थायी धारा 370 चली उस वक्त हिसाब क्यों नहीं मांगते थे? अस्थायी प्रावधान को नहीं उखाड़ा, क्योंकि वोट बैंक की राजनीति करनी थी।
शाह ने कहा कि जिन्हें पीढ़ियों तक देश में शासन करने का मौका मिला, वे अपने गिरेबां में झांककर देखें, क्या आप हमसे 17 महीने का हिसाब मांगने के लायक हैं या नहीं। गृह मंत्री ने कहा कि मैं इस सदन को फिर से एक बार कहना चाहता हूं कि कृपया जम्मू-कश्मीर की स्थिति को समझें। राजनीति करने के लिए कोई ऐसा बयान न दें, जिससे जनता गुमराह हो। गृह मंत्री ने कहा कि औवेसी अफसरों का भी हिंदू-मुस्लिम में विभाजन करते हैं। एक मुस्लिम अफसर हिंदू जनता की सेवा नहीं कर सकता या हिंदू अफसर मुस्लिम जनता की सेवा नहीं कर सकता क्या? उन्होंने कहा कि अफसरों को हिंदू-मुस्लिम में बांटते हैं और खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते हैं।
गौरतलब है कि AIMIM सांसद असादुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने जम्मू-कश्मीर में आबादी के हिसाब से मुस्लिम अफसरों की संख्या कम होने का आरोप लगाया था। ओवैसी ने आरोप लगाया कि आर्टिकल 370 को असंवैधानिक तरीके से खत्म किया गया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने सदन में कहा था कि जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे को जल्द बहाल किया जाएगा, लेकिन इस विधेयक से साफ है कि वह इसे पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं देने जा रहे हैं। इसका मतलब यह है कि उनकी बात सिर्फ एक जुमला साबित हुई है। ओवैसी ने सवाल किया कि क्या सरकार पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करेगी?
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