MGNREGA Fund Scam: झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल को ED ने किया गिरफ्तार, पूछताछ में 'टालमटोल' कर रही थीं IAS अधिकारी

IAS पूजा सिंघल को MGNREGA फंड के कथित गबन और दूसरे आरोपों से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में गिरफ्तार किया गया है

अपडेटेड May 11, 2022 पर 6:16 PM
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झारखंड की खनन सचिव पूजा सिंघल को ED ने किया गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड की खनन सचिव IAS अधिकारी पूजा सिंघल (Pooja Singhal) को गिरफ्तार कर लिया है। महिला अधिकारी को MNGREGA फंड के कथित गबन और दूसरे आरोपों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले दिन में पूजा सिंघल ED के दफ्तर पहुंचीं थी, जहां उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सूत्रों ने दावा किया कि सिंघल ने अपने जवाबों में 'टालमटोल' कर रही थीं। इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) उन्हें रिमांड के लिए यहां की एक स्थानीय अदालत में पेश करेगा।

अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि खूंटी में MNGREGA फंड की कथित हेराफेरी से जुड़े धनशोधन मामले और दूसरे आरोपों की जांच के सिलसिले में वह दूसरे दिन ED के सामने पेश हुईं थीं।


साल 2000 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी सुबह करीब 10 बजकर 40 मिनट पर हिनू इलाके में एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचीं। संघीय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अधिकारी का बयान दर्ज किया। इससे पहले वह मंगलवार को ED के कार्यालय में करीब नौ घंटे तक मौजूद रहीं।

एजेंसी ने उनके कारोबारी पति अभिषेक झा का भी बयान दर्ज किया है। एजेंसी ने मामले के सिलसिले में कोलकाता में फिर से छापे भी मारे।

दंपति से पूछताछ ईडी की तरफ से नौकरशाह, उनके पति, उनसे जुड़ी संस्थाओं और अन्यों के खिलाफ छह मई को झारखंड और कुछ दूसरे स्थानों पर छापेमारी के बाद हुई है।

एजेंसी ने चार SUV- एक जगुआर, एक फॉर्च्यूनर और होंडा ब्रांड की दो कारें भी जब्त की हैं, जो धन शोधन रोधी कानून के तहत गिरफ्तार चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) सुमन कुमार या उससे जुड़े व्यक्तियों के नाम पर थीं। सुमन कुमार पूजा सिंघल के CA थे।

क्या था मामला?

सिंघल और दूसरे लोगों के खिलाफ ED की जांच धन शोधन के उस मामले से जूड़ी है, जिसमें झारखंड सरकार में पूर्व कनिष्ठ अभियंता राम बिनोद प्रसाद सिन्हा को एजेंसी ने 17 जून, 2020 को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था। एजेंसी ने सिन्हा को 2012 में PMLA के तहत दर्ज राज्य सतर्कता ब्यूरो की FIR के आधार पर गिरफ्तार किया था।

सिन्हा के खिलाफ जनता के पैसे की धोखाधड़ी करने के आरोप में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े भारतीय दंड संहिता (IPC) की आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। सिन्हा ने इस पैसे को एक अप्रैल 2008 से 21 मार्च 2011 तक कनिष्ठ इंजीनियर के रूप में काम करते हुए अपने नाम के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर निवेश किया था।

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