मॉर्गन स्टैनली इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर रिधम देसाई का कहना है कि देश में सप्लाई चेन से जुड़ी परेशानियों के निवारण के लिए सरकार की तरफ से किए गए नीतिगत सुधारों, इकोनॉमी के फॉर्मलाइजेशन, इंसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड जैसे कानूनों और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए रेरा जैसे कानून ने भारतीय अर्थव्यवस्था के रूप रंग को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये सारे सुधार पिछले एक दशक के दौरान हुए हैं। इसके चलते पूरी दुनिया में भारत की छवि में काफी बड़ा सुधार हुआ है
31 मई को जारी 'India Equity Strategy and Economics: How India Has Transformed in Less than a Decade'शीर्षक वाली रिपोर्ट में रिधम देसाई ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत ने पिछले एक दशक में वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान बनाई है। इसके चलते भारत की मैक्रो इकोनॉमिक स्थितियों और मार्केट आउटलुक पर पॉजिटिव असर देखने को मिला है।
2014 के बाद किए गए रिफॉर्म के चलते सुधरी भारत की छवि
अपनी इस रिपोर्ट में उन्होंने आगे कहा है कि पहले विदेशी निवेशकों के मन में भारत को लेकर तमाम आशंकाएं हुआ करती थी। उनका मानना था कि भारत में तमाम संभावनाएं होने के बावजूद भी इसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। दुनिया की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली दूसरी इकोनॉमी होने और पिछले 25 साल में स्टॉक मार्केट का टॉप परफॉर्मर होने के बावजूद भारत को लेकर विदेशी निवेशकों में तमाम आशंकाएं थी। उनका मानना था कि भारत का इक्विटी बाजार का वैल्यूएशन काफी मंहगा है। लेकिन 2014 के बाद सरकार की तरफ से किए गए रिफॉर्म के चलते भारत को लेकर विदेशी निवेशकों की धारणा में काफी सकारात्मक बदलाव हुए हैं।
8 सालों इंफ्रास्ट्रक्चर में हुआ काफी सुधार
सप्लाई साइड पॉलिसी रिफॉर्म पर बात करते हुए रिधम देसाई ने इस बात को रेखांकित किया कि भारत का कॉर्पोरेट टैक्स इस समय दुनिया के तमाम विकसित देशों के बराबर हो गया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले 8 सालों के दौरान भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी विकास हुआ है। कई नेशनल हाइवे बने हैं। देश में ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा रेलवे रूट के इलेक्ट्रिफिकेशन में भी काफी ज्यादा प्रगति हुई है।
जीएसटी के कलेक्शन में लगातार बढ़त
इकोनॉमी के फॉर्मलाइजशन पर रिधम देसाई का कहना है कि देश में जीएसटी के कलेक्शन में लगातार बढ़त हो रही है। इस समय देश की जीडीपी में डिजिटल ट्रांजैक्शन की हिस्सेदारी 76 फीसदी से ज्यादा हो गई है। रिधम देसाई का मानना है कि आगे देश की जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग और कैपेक्स की हिस्सेदारी में बढ़त देखने को मिलेगी।
देसाई का ये भी मानना है कि 2031 तक भारत की एक्सपोर्ट मार्केट में हिस्सेदारी बढ़कर 4.5 फीसदी हो जाएगी, जो 2021 के स्तर से करीब दोगुना है। आगे हमें भारत से वस्तुओं और सेवाओं का भारी मात्रा में एक्सपोर्ट होता नजर आएगा। भारत के प्रति व्यक्ति आय में बढ़त के चलते आगे देशवासियों के खपत के तौर तरीके में भी बदलाव होगा। इसके चलते हमें गैर जरूरी खपत (discretionary consumption) से जुड़े उत्पादों में बिक्री में बढ़त देखने के मिलेगी।