Mahakumbh Stampede: 'बचने का कोई मौका नहीं था' 'भीड़ मेरे ऊपर से गुजर गई' महाकुंभ में भगदड़ जैसे हालात, भयावह रात की कहानी, पीड़ितों की जुबानी
Mahakumbh Stampede News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चार बार बात की और स्थानीय रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि इस घटना में कम से कम 15 लोगों के मारे जाने की आशंका है। हालांकि, मौतों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, अधिकारियों ने कहा कि लगभग 35 श्रद्धालु घायल हो गए हैं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है
Mahakumbh Stampede: महाकुंभ में भगदड़ जैसे हालात, भयावह रात की कहानी, पीड़ितों की जुबानी
प्रयागराज महाकुंभ में बुधवार तड़के भगदड़ जैसे हालात बन गए है, जिसमें कई लोग घायल हो गए। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जताया। अधिकारियों ने कहा कि चल रहे महाकुंभ के बीच बुधवार को संगम पर "भगदड़" जैसी स्थिति पैदा होने के बाद कई लोगों के हताहत होने की आशंका है, क्योंकि लाखों तीर्थयात्री मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान के लिए मेले में आए थे। घटना बाद, अखाड़ों ने मौनी अमावस्या के लिए अपना पारंपरिक 'अमृत स्नान' भी रद्द कर दिया था। हालांकि, हालात फिलहाल हालात काबू में होने के बाद फिर से 'अमृत स्नान' शुरू किया गया।
हमारे सहयोगी चैनल CNN-News18 के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चार बार बात की और स्थानीय रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि इस घटना में कम से कम 15 लोगों के मारे जाने की आशंका है। हालांकि, मौतों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, अधिकारियों ने कहा कि लगभग 35 श्रद्धालु घायल हो गए हैं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
महाकुंभ में क्यों मची भगदड़?
दरअसल मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान महाकुंभ का सबसे महत्वपूर्ण आयोजन होता है और इसमें करीब 10 करोड़ लोगों के गंगा में डुबकी लगाने की संभावना है। इस साल, 144 सालों के बाद 'त्रिवेणी योग' नाम का एक दुर्लभ खगोलीय संयोग बन रहा है, जो इस दिन के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ा रहा है।
अब आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि महाकुंभ में मौन अमावस्या पर स्नान के लिए के कितनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे होंगे। आधी रात के बाद लगभग दो बजे कुंभ मेला क्षेत्र में लाउडस्पीकर से गूंजते मंत्रों और श्लोकों के लगातार उच्चारण के बीच, भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसके के बाद पूरा इलाके में संगम की ओर दौड़ती एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ियों के तेज सायरन की आवाजें गूंज उठीं।
घायलों को मेला क्षेत्र में बने केंद्रीय अस्पताल में ले जाया गया। कई घायलों के रिश्तेदार भी वहां पहुंचे, साथ ही कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी वहां पहुंचे।
क्या बोले प्रत्याक्षदर्शी?
कई प्रत्याक्षदर्शियों ने जो बताया वो बेहद ही डरावना था। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरोजनी अस्पताल के बाहर कर्नाटक से आई एक महिला रोती हुई दिखी, जिसने कहा, "हम दो बसों में 60 लोगों के एक ग्रुप में आए थे, ग्रुप में हम नौ लोग थे। अचानक भीड़ में धक्का-मुक्की होने लगी और हम फंस गए। हममें से कई लोग गिर गए और भीड़ बेकाबू हो गई।" महिला ने बताया, "बचने का कोई मौका नहीं था, हर तरफ से धक्का-मुक्की हो रही थी।"
मध्य प्रदेश के छतरपुर से आए एक व्यक्ति ने कहा कि उसकी मां घायल हो गई है और अस्पताल में भर्ती है, जबकि मेघालय के एक पति पत्नी भीड़ से दूर रोते हुए, वहां मौजूद पत्रकारों को हंगामे में फंसने के अपने दुख के बारे में बता रहे थे।
अस्पताल में एक और महिला, जिसके बच्चे को चोटें आई थीं, उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए दावा किया, "वहां जाने के लिए कोई जगह नहीं थी। जिन लोगों ने हमें धक्का दिया था, वे हंस रहे थे, जबकि हम उनसे बच्चों पर दया दिखाने की भीख मांग रहे थे।"
'लोग बस उसके ऊपर से गुजरते जा रहे थे'
Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, सुल्तानपुर से अपने परिवार के साथ आए बासदेव शर्मा ने कांपती हुई आवाज में बताया, "वाहां अचानक बहुत ज्यादा भीड़ हो गई। मेरे परिवार का एक सदस्य भगदड़ में कुचल गया। हम डुबकी लगा चुके थे और वापस लौट रहे थे, तभी हमने उसे बेहोश पड़ा हुआ देखा।"
भक्तों की लगातार बढ़ती भीड़ के कारण उनके रिश्तेदार की छाती और पैरों में गंभीर चोटें आईं। उन्होंने कहा, "लोग बस उसके ऊपर से गुजरते जा रहे थे। किसी ने उन्हें रोका भी नहीं।”
'भीड़ मेरे ऊपर से गुजर गई'
राम प्रसाद यादव भी सुल्तानपुर से आए थे। उन्होंने कहा कि जब भीड़ खतरनाक रूप से बढ़ गई, तो उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उन्होंने कहा, "मैं नदी की ओर बढ़ रहा था, तभी अचानक मुझे लगा कि मैं गिर रहा हूं। इससे पहले कि मैं उठ पाता, भीड़ मेरे ऊपर से गुजर गई।"
उन्हें तो हल्की चोट लगी, लेकिन उनकी 65 साल की मां इस अफरा-तफरी में गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्होंने कहा, "हमें उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलानी पड़ी, लेकिन अब हमारे पास पैसे नहीं हैं। फोन नहीं है। मुझे यह भी नहीं पता कि हम घर कैसे लौटेंगे।"
परिवार ने थककर एक पुल के नीच शरण ली
स्नान करने आईं देविका के लिए ये हादसा किसी बुरे सपने से कम नहीं है। उनकी आंटी बाई राजपूत लापता हैं। उन्होंने कहा, "जब हम लगभग 12:30 बजे नहाने के लिए गए, तो हम में से 20 लोग एक साथ थे। फिर भीड़ बढ़ने लगी। कुछ ही मिनटों में हमने उन्हें खो दिया।
वह कई घंटों खोया-पाया केंद्रों के चक्कर काटती रहीं और अपनी आंटी के नाम का एनाउंसमेंट कराती रहीं। उन्होंने कहा, "अब तक, वह नहीं मिली है।"
उनका परिवार सदमे में था और थककर एक पुल के नीचे शरण लिए हुए थे। रात में इतनी ठंड में गीली साड़ी में घंटों बिताने वाली देविका ने कहा, “मेरी आंटी के पास कुछ भी नहीं था, बस एक शॉल थी। इस समय, मुझे नहीं पता कि वह अभी भी जिंदा भी हैं या नहीं।
'आखिरी बार पत्नी को नदी में जाने से पहले देखा'
झारखंड से किशोर कुमार साहू अपने परिवार के दस लोगों के साथ पवित्र स्नान करने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने दोपहर में स्नान किया और रात को दोबारा डुबकी लगाने के लिए लौटे। उन्होंने याद करते हुए बताया, "मैंने अपनी पत्नी को नदी में जाने से पहले अपने कपड़े बदलते देखा था। बस आखिरी बार उसे तभी देखा था।"
उन्होंने कहा, भीड़ अचानक तेज हो गई, जिससे लोग एक पल में अलग हो गए। हाथ में पत्नी का आधार कार्ड और मुड़े हुए कुछ नोटों की एक छोटी सी गड्ड लेकर किशोर तब से अपनी पत्नी की तलाश कर रहे थे।
'जब तक हम पहुंचे बहुत देर हो चुकी थी'
एक एंबुलेंस ड्राइवर सर्वेश सिंह के लिए, वो रात बहुत भागादौड़ वाली थी। उन्होंने कहा, "प्रशासन ने हमारे लिए रास्ता साफ कर दिया, लेकिन जब तक हम वहां पहुंचे, तब तक कुछ लोगों के लिए बहुत देर हो चुकी थी। मैं दो शव और एक शख्स को लेकर गया था। उसका पैर बहुत ही बुरी तरह से घायल था।
गुना के रमेश ने कहा कि वह अपनी पत्नी और दो बच्चों की तलाश में कल रात से घाटों पर भटक रहे हैं। उन्होंने बड़ी दुखभरी आवाज में कहा, "स्थिति ऐसी थी कि आप किसी को नहीं बचा सकते थे। मुझे अपनी जान बचाने के लिए भी भागना पड़ा।"
भीड़ से जैसे तैसे निकल कर जब वह पीछे मुड़े, तो उनका परिवार वहां नहीं था। उन्होंने कहा, “अब, वे गायब हैं। मेरे पास न फोन है, न पैसे। मैं नहीं जानता कि वे कहां हैं। मैं यह भी नहीं जानता कि उन्हें कहां से ढूंढना शुरू करूं।"
भक्तों से CM योगी की अपील
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, सीएम योगी ने भक्तों से अपील की कि वे 'त्रिवेणी संगम' नदी की ओर न जाएं, बल्कि प्रयागराज में कई जगहों पर बने 'स्नान' घाटों पर ही पवित्र स्नान करें। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने का भी आग्रह किया।
कुंभ मेला के SSP राजेश द्विवेदी ने कहा कि महाकुंभ में कोई भगदड़ नहीं हुई, यह सिर्फ भीड़भाड़ थी। तो महाकुंभ के DIG वैभव कृष्ण ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, "अमृत स्नान शुरू होने वाला है... सब कुछ पारंपरिक रूप से किया जाएगा... पुलिस और प्रशासन सभी अखाड़ों को उनके पारंपरिक जुलूसों में सहायता करेगा... स्थिति कंट्रोल में है। आज सुबह की घटना के कारणों की जांच की जा रही है, क्योंकि 10 करोड़ से ज्यादा भक्तों के आने की उम्मीद है।"