मैरिटल रेप यानि शादी के बाद पत्नी की इजाजत के बिना पति द्वारा जबरन शारीरिक संबंध बनाना। इसे अपराध माना जाए या नहीं, इसे लेकर सरकार और सुप्रीम कोर्ट आमने-सामने हैं। मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में लाने की मांग कई सालों से उठ रही है। लेकिन अब जब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है, तो केंद्र सरकार ने एक हलफनामा दायर करके ये कह दिया है कि मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की जरूरत नहीं है। सरकार ने कहा है कि ये मुद्दा कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक है और सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। सभी स्टेकहोल्डर्स से चर्चा किए बिना इस पर फैसला नहीं लिया जा सकता। मामला शादीशुदा महिलाओं की मर्जी का है और गंभीर है। इसके पक्ष में और खिलाफ तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। मैरिटल रेप को अपराध माना जाए या नहीं इसी मुद्दे सीएनबीसी-आवाज़ के खास शो आवाज़ अड्डा पर हुई एक खास चर्चा।
