लोकसभा में आज पारित हो सकता है OBC बिल, सरकार पेश करेगी संविधान संशोधन विधेयक

सोमवार को विपक्ष ने फैसला किया कि वो इस संविधान संशोधन को मंजूरी देने में सरकार का सहयोग करेगा

अपडेटेड Aug 10, 2021 पर 12:12 PM
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केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार मंगलवार को लोकसभा में पारित कराने के लिए संविधान (127वां) संशोधन विधेयक पेश करेंगे। इस संवैधानिक संशोधन का उद्देश्य पिछड़ी जातियों की पहचान करने के लिए राज्यों की शक्ति को बहाल करना है, सोमवार को निचले सदन में पेश किया गया। ये एक संवैधानिक संशोधन है, इसलिए इसे दोनों सदनों में पारित करने की जरूरत है।

सोमवार को विपक्ष ने फैसला किया कि वो इस संविधान संशोधन को मंजूरी देने में सरकार का सहयोग करेगा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के दफ्तर में हुई एक बैठक में दो दल विरोध करने के पक्ष में थे, दूसरे दलों की राय थी कि संविधान संशोधन को मंजूरी दी जानी चाहिए, क्योंकि ये राज्यों को एक बहुत ही संवेदनशील विषय पर अधिकार देता है।

127 वें संविधान संशोधन विधेयक 2021 का उद्देश्य मई 2021 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को दरकिनार करना है, जिसमें कहा गया था कि केवल केंद्र ही सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) को अधिसूचित कर सकता है और राज्यों को नहीं।

इसके अलावा, केंद्रीय आयुष मंत्री राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (संशोधन) विधेयक, 2021 और राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (संशोधन) विधेयक, 2021 को भी पारित करने के लिए पेश करेंगे।

दोनों विधेयक सोमवार को पेश किए गए, लेकिन सदन के बार-बार स्थगित होने के कारण चर्चा नहीं हो सकी - निचले सदन को पांच बार स्थगित किया गया।

इस बीच, राज्यसभा में भी मंगलवार को कोई नया विधेयक नहीं देखा जाएगा। मंगलवार के लिए राज्यसभा की बिजनेस लिस्ट में एक को छोड़कर, सोमवार के समान विधेयक को लिस्टेड किया गया है। ये बिल हैं सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021, विनियोग (नंबर 4) विधेयक, 2021 और विनियोग (नंबर 3) विधेयक, 2021।


राज्यसभा को सोमवार को इन पर चर्चा करनी थी, लेकिन कराधान कानून (संशोधन) विधेयक, 2021 और केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021 पर चर्चा हुई, जिन्हें सप्लीमेंट्री लिस्ट ऑफ बिजनेस में जोड़ा गया था। दोनों बिल लोकसभा में पास हो गए। विपक्ष ने चर्चा की तैयारी के लिए समय की कमी का हवाला देते हुए नए विधेयकों को सप्लीमेंट्री लिस्ट में शामिल करने पर आपत्ति जताई।

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