Coronavirus Updates: इन दिनों एक बार कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले बड़ी ही तेजी से बढ़ रहे हैं। इसी के चलते देशभर के अस्पतालों में सरकार के निर्देश पर मॉकड्रिल भी किया जा रहा है। इस बीच ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेस (AIIMS) के पूर्व डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया (Randeep Guleria) ने News18.com को बताया कि फ्लू शॉट्स की तरह, भारत को अपने Covid-19 बूस्टर डोज (Booster Dose) को कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के साथ अपडेट करने की जरूरत हो सकती है।
एक प्रसिद्ध पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. गुलेरिया ने कहा कि भारत में वर्तमान में वुहान स्ट्रेन या दिसंबर 2019 में फैल रहे स्ट्रेन के आधार पर बनी ही वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
डॉ. गुलेरिया ने कहा, "अब तक, वायरस का स्ट्रेन बदल गया है और नाटकीय रूप से विकसित हुआ है। अल्फा, बीटा, डेल्टा से लेकर अब ओमिक्रॉन और इसके सब-लाइनेज तक, वायरस बहुत पहले म्यूटेट हो चुका है।”फ्लू के वैक्सीन सर्कुलेशन में नए स्ट्रेन का इस्तेमाल करके हर साल अपडेट किए जाते हैं।
गुलेरिया के मुताबिक, जब भारतीय वैक्सीन की ट्रायल में टेस्टिंग की गई, तो उनके 80 से 90% असरदार होने की जानकारी सामने आई, लेकिन अब 'नए स्ट्रेन के खिलाफ इन वैक्सीन का असर काफी कम हो सकता है।'
गुलेरिया, AIIMS बिलासपुर के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और UK समेत दूसरे देशों ने पहले ही अपने वैक्सीन को अपडेट कर दिया है। उन्होंने कहा, "वे अब बाइवेलेंट वैक्सीन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पुराने स्ट्रेन और लेटेस्ट ओमिक्रॉन स्ट्रेन दोनों के खिलाफ काम करते हैं।"
उन्होंने कहा, "हमें ज्यादा डेटा का विश्लेषण करने की जरूरत है, अगर वैक्सीन को अपडेट करना ज्यादा समझ में आता है और क्या लोगों को पुराने के बजाय लेटेस्ट स्ट्रेन का इस्तेमाल करके वैक्सीन लगाया जाना चाहिए।"
गुलेरिया ने कहा कि भारत में नोवेल कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, लेकिन घबराहट पैदा करने की जरूरत नहीं है, लेकिन ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
भारत ने 24 घंटे में 5,880 नए Covid-19 मामले सामने आए हैं। सरकारी डेटा ने सोमवार को बताया, एक्टिव केसलोड अब 35,199 तक पहुंच गया। डेली पॉजिटिविटी रेट 6.91% है, जबकि वीकली पॉजिटिविटी रेट 3.67% है।
मेदांता में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल मेडिसिन, रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन के अध्यक्ष गुलेरिया ने मामलों में उछाल के पीछे तीन कारण बताए- पहला जनता के बीच कोविद-उपयुक्त व्यवहार की कमी, दूसरा वायरस में म्यूटेशन इसे और ज्यादा संक्रामक बनाता है, तीसरा मौसम में बदलाव के कारण ज्यादा वायरल इंफेक्सन होता है।
उन्होंने सहमति जताई कि नया XBB.1.16 वैरिएंट हाल ही में संक्रमण बढ़ने का एक कारण हो सकता है। उन्होंने कहा, "ये ओमिक्रॉन का सब-लाइनेज भी है और हमने अतीत में देखा है कि ओमिक्रॉन हल्के संक्रमण की ओर जाता है।"
हालांकि, उन्होंने खासतौर से बुजुर्गों और पुरानी बीमारी वाले लोगों समेत कमजोर आबादी के बीच सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी, "अगर संक्रमण के मामले बढ़ेंगे, तो इन कमजोर लोगों को बीमारी होने की संभावना भी बढ़ जाती है।"