Labour Code Rules: मोदी सरकार1 अक्टूबर से देश भर में लेबर कोड के नियमों को लागू करना चाहती थी लेकिन राज्यों की तैयारी न होने और उत्तर प्रदेश समेत देश के 5 राज्यों में होने वाले चुनाव के कारण इन नियमों को लागू नहीं किया गया। मोदी सरकार ने इसे अगले साल यानी 2022 तक के लिए टाल दिया। अगर मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार अब इन्हे अगले साल तक लागू कर सकती है। यानी जब अगले साल ज्यादातर दफ्तरों में कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम की जगह ऑफिस आकर काम करना शुरू करेंगे तो उन्हें 12 घंटे की नौकरी करनी पड़ सकती है। अभी ज्यादार आईटी कंपनियों में कर्मचारी कोविड-19 के चलते वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं।
श्रम कानून लागू होने से आएंगे ये बदलाव
हाथ में आने वाला वेतन घट जाएगा
श्रम कानून लागू होने से कर्मचारियों के हाथ में आने वाला वेतन घट जाएगा और कंपनियों को ऊंचे पीएफ दायित्व का बोझ उठाना पड़ेगा। नए ड्राफ्ट रूल के अनुसार, मूल वेतन कुल वेतन का 50% या अधिक होना चाहिए। इससे ज्यादातर कर्मचारियों की वेतन का स्ट्रक्चर में बदलाव आएगा। बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी के लिए कटने वाला पैसा बढ़ जाएगा क्योंकि इसमें जानें वाला पैसा बेसिक सैलरी के अनुपात में होता है। अगर ऐसा होता है जो आपके घर आने वाली सैलरी घट जाएगी रिटायरमेंट पर मिलने वाला PF और ग्रेच्युटी का पैसा बढ़ जाएगा।
नए ड्राफ्ट कानून में कामकाज के अधिकतम घंटों को बढ़ाकर 12 करने का प्रस्ताव है। हालांकि, होगा।लेबर यूनियन 12 घंटे नौकरी करने का विरोध कर रही हैं। कोड के ड्राफ्ट नियमों में 15 से 30 मिनट के बीच के अतिरिक्त कामकाज को भी 30 मिनट गिनकर ओवरटाइम में शामिल करने का प्रावधान है। मौजूदा नियम में 30 मिनट से कम समय को ओवरटाइम योग्य नहीं माना जाता है। ड्राफ्ट नियमों में किसी भी कर्मचारी से 5 घंटे से ज्यादा लगातार काम कराने की मनाही है। कर्मचारियों को हर पांच घंटे के बाद आधा घंटे का रेस्ट देना होगा।
संसद में हो चुका है पारित
संसद द्वारा इन चार संहिताओं को पारित किया जा चुका है, लेकिन केंद्र के अलावा राज्य सरकारों को भी इन संहिताओं, नियमों को अधिसूचित करना जरूरी है। उसके बाद ही ये नियम राज्यों में लागू हो पाएंगे। ये नियम 1 अप्रैल 2021 से लागू होने थे लेकिन राज्यों की तैयारी पूरी नहीं होने के कारण इन्हें टाल दिया गया।