दिल्ली: LG ने भ्रष्टाचार के आरोप में MCD के 6 अधिकारियों को किया निलंबित, सब-रजिस्ट्रार के खिलाफ CBI को केस चलाने की दी मंजूरी

LG ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार की आबकारी नीति 2021-22 में नियमों के उल्लंघन तथा प्रक्रियागत खामियों को लेकर इसकी CBI से जांच कराए जाने की सिफारिश की है

अपडेटेड Jul 26, 2022 पर 4:31 PM
उपराज्यपाल ने एक सब-रजिस्ट्रार के खिलाफ CBI को केस चलाने की भी मंजूरी दी है

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के छह अधिकारियों को भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने के आरोप में निलंबित करने का आदेश दिया है। उपराज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि सक्सेना ने करोल बाग में अनधिकृत निर्माण को कथित रूप से नियमित करने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक सब-रजिस्ट्रार के खिलाफ मुकदमा चलाने की भी अनुमति दी है।

एक सूत्र ने कहा कि एमसीडी कमिश्नर ने घोर लापरवाही बरतरने, आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने और अनुचित लाभ लेने के मामले में उपराज्यपाल के निर्देश पर 6 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, MCD, दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतों पर मेरिट के आधार पर फैसला किया जा रहा है।

इससे पहले उपराज्यपाल ने पिछले हफ्ते 22 जुलाई को केजरीवाल सरकार की आबकारी नीति 2021-22 से संबंधित कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। एलजी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार की आबकारी नीति 2021-22 में नियमों के उल्लंघन तथा प्रक्रियागत खामियों को लेकर इसकी सीबीआई से जांच कराए जाने की सिफारिश की है।


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अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली के मुख्य सचिव की इस महीने की शुरुआत में सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई जांच की सिफारिश की गई है। इस रिपोर्ट से प्रथम दृष्टया राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) अधिनियम, 1991, व्यापारिक लेनदेन की नियमावली-1993, दिल्ली आबकारी अधिनियम, 2009 और दिल्ली आबकारी नियम, 2010 के उल्लंघनों का पता चलता है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा रिपोर्ट में शराब के ठेकों के लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने के लिए जानबूझकर और घोर प्रक्रियागत खामियां करने का भी जिक्र है। नई आबकारी नीति 2021-22 पिछले साल 17 नवंबर से लागू की गई थी, जिसके तहत 32 मंडलों में विभाजित शहर में 849 ठेकों के लिए बोली लगाने वाली निजी संस्थाओं को रिटेल लाइसेंस दिए गए।

हालांकि, कई शराब की दुकानें खुल नहीं पाई। ऐसे कई ठेके नगर निगम ने सील कर दिए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने इस नीति का पुरजोर विरोध किया था और इसकी जांच के लिए उपराज्यपाल के साथ केंद्रीय एजेंसियों में शिकायत दर्ज कराई थी।

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