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हरियाणा चुनाव में हावी रहेगी जाति! अपने-अपने लोगों को टिकट दिलाने की पैरवी कर रहे समुदाय, पर्टियों पर बना रहे दबाव

Haryana Election 2024: विशेषज्ञ कहते हैं कि भले ही अलग-अलग पार्टियों का सिलेक्शन करने का तरीका अलग है और उन्होंने औपचारिक आवेदन भी लिए हैं, लेकिन समुदाय और जातीय समूहों की ओर से उठाई गई मांग और पार्टी आलाकमान या नेतृत्व पर उनका दबाव टिकट तय करने में अहम भूमिका निभाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 22, 2024 पर 6:39 PM
हरियाणा चुनाव में हावी रहेगी जाति! अपने-अपने लोगों को टिकट दिलाने की पैरवी कर रहे समुदाय, पर्टियों पर बना रहे दबाव
Haryana Election 2024: करनाल में पंजाबी समाज सम्मेलन में कांग्रेस नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा

हरियाणा विधानसभा चुनाव का ऐलान होते ही सभी दलों ने उम्मीदवारों के चयन के लिए अलग-अलग प्रक्रिया शुरू कर दी हैं। हालांकि, भारत में छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा चुनाव जातीय समीकरण के बिना जीतना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। यही कड़वी सच्चाई है। इस चुनाव में भी पार्टियों के लिए अपने उम्मीदवारों का नाम फाइनल करना इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि कई समुदाय और जाति-आधारित संगठनों ने अपने-अपने नेताओं के लिए पैरवी शुरू कर दी है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि अगर आपको किसी पार्टी से चुनाव का टिकट चाहिए, तो उसके लिए केवल राजनीतिक अनुभव और छवि ही काम नहीं आएगी, बल्कि किसी समुदाए का समर्थन भी जरूरी है।

वह आगे कहते हैं कि साथ ही उस जाति या समुदाय का दबाव भी किसी एक खास पार्टी पर होना चहिए तभी आपको टिकट मिल सकता है।

जितना ज्यादा वोट उतना ज्यादा दबाव

विशेषज्ञ कहते हैं कि भले ही अलग-अलग पार्टियों का सिलेक्शन करने का तरीका अलग है और उन्होंने औपचारिक आवेदन भी लिए हैं, लेकिन समुदाय और जातीय समूहों की ओर से उठाई गई मांग और पार्टी आलाकमान या नेतृत्व पर उनका दबाव टिकट तय करने में अहम भूमिका निभाता है।

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