Hemant Soren Mining Lease Case: माइनिंग लीज मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) के फैसले को रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट ने माइनिंग लीज मामले में मुख्यमंत्री सोरेन के खिलाफ जांच को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) को सुनवाई के योग्य माना था। इसके खिलाफ सोरेन और झारखंड सरकार दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने PIL को राजनीति से प्रेरित बताया था।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखने के आधार पर याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा था कि याचिका सुनने लायक है। अब सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने ने मंगलवार को ट्वीट किया, ''सत्यमेव जयते (Satyamev Jayate)''
सुप्रीम कोर्ट ने माइनिंग लीज मामले की जांच संबंधी जनहित याचिकाओं को सुनवाई योग्य बताने वाले हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं राज्य सरकार की याचिकाओं को सोमवार को स्वीकार कर लिया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता पर राज्य के खनन मंत्री रहते हुए खुद को खनन पट्टा देने का आरोप लगाया गया है। पीठ ने कहा, ‘‘हमने इन दो याचिकाओं को अनुमति दे दी है और जनहित याचिकाओं को सुनवाई योग्य नहीं ठहराते हुए झारखंड हाई कोर्ट के तीन जून, 2022 को पारित आदेश को दरकिनार कर दिया है।’’
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित, जस्टिस एसआर भट और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर झारखंड सरकार और सोरेन की अलग-अलग याचिकाओं पर 17 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
झारखंड सरकार ने अगस्त में सुप्रीम कोर्ट में एक शेल कंपनी के संबंध में PIL और सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ ED और CBI जांच की मांग करने वाले माइनिंग लीज मामले को खारिज करने के लिए एक विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।
RTI कार्यकर्ता ने दायर की थी याचिका
इससे पहले सीएम सोरेन ने दो जनहित याचिकाओं के जरिए कोर्ट को गुमराह करने के आरोप में RTI कार्यकर्ता शिव शर्मा के खिलाफ IPC की धारा 340 के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। सोरेन ने शर्मा पर उनकी छवि खराब करने और खराब करने का आरोप लगाया था।