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ब्यूरोक्रेसी में सुधार चाहते थे IAS अप्पू, लेकिन पूरी नहीं हो पाई उनकी ये इच्छा

अप्पू ने प्रशासन में गिरावट को रोकने के लिए उसमें बड़े बदलाव की सलाह दी थी जिसे बाद की किसी सरकार ने स्वीकार नहीं किया था

Surendra Kishoreअपडेटेड Apr 25, 2023 पर 8:03 PM
ब्यूरोक्रेसी में सुधार चाहते थे IAS अप्पू, लेकिन पूरी नहीं हो पाई उनकी ये इच्छा
1973-74 में ही केंद्रीय प्रशासन में गिरावट दिखनी शुरू हो गई थी

वरिष्ठ अधिकारी पी.एस.अप्पू ब्यूरोक्रेसी में सुधार की इच्छा लिए सन 2012 में गुजर गए। वे मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी के निदेशक और बिहार के मुख्य सचिव रह चुके थे।

उनका देहांत सन 2012 में हुआ। उनके अनुसार सन 1973-74 में ही केंद्रीय प्रशासन में गिरावट दिखनी शुरू हो गई थी। IAS जमात को कभी स्टील फ्रेम ब्यूरोक्रेसी कहा जाता था। लेकिन अब तो जानकारों का मानना है कि अपवादों को छोड़कर स्टील फ्रेम बुरी तरह जंगग्रस्त हो चुका है।

सन 2005 में लिखे गए अपने लेख में दिवंगत पी.एस.अप्पू ने कहा था कि कि सन 1973-74 में कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों ने एक प्रतिबद्ध अफसरशाही की जरूरत पर लगातार बल दिया गया था। बिहार और गुजरात की सरकारों ने वहां के जन आंदोलनों को बलपूर्वक नियंत्रित किया। इससे स्थिति बिगड़ती गई।

सन 1951 बैच के IAS अधिकारी पी.एस.अप्पू का जब निधन हुआ तब वे 83 साल के थे। वे ईमानदार अफसरों के रोल माॅडल रहे। उच्चस्तरीय ब्यूरोक्रेसी में आ रही तेज गिरावट को लेकर अपने जीवन के आखिरी दिनों में वे काफी चिंतित रहा करते थे। पूरे सेवा काल में उसूलों के साथ जिये अप्पू ने नौकरशाही में सुधार के कई उपाय बताये थे।

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