आपातकाल (सन 1975-77) में केंद्र सरकार के एटर्नी जनरल नीरेन डे ने सुप्रीम कोर्ट में साफ-साफ यह कह दिया था कि "यदि स्टेट आज किसी की जान भी ले ले तो भी उसके खिलाफ कोई व्यक्ति कोर्ट की शरण नहीं ले सकता। क्योंकि ऐसे मामलों को सुनने के कोर्ट के अधिकार को स्थगित कर दिया गया है।" याद रहे कि अंग्रेजों के राज में भी जीने का अधिकार नहीं छीना गया था। आज कुछ नेता यह कह देते हैं कि देश में आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं। दरअसल तब के आपातकाल के असली हालात से वे पूरी तरह अनजान हैं।
