कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Assembly Election) के तहत बुधवार को होने वाले मतदान से पहले सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने करीब महीने भर चले प्रचार अभियान के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को रखा और उनके करिश्मे की बदौलत सत्ता विरोधी लहर को पाटने और ‘डबल इंजन’ सरकार (Double Engine Government) के अपने अभियान को मजबूत करने की हर कवायद की। हालांकि, इसका नतीजा तो 13 मई को सामने आएगा, जब वोटों की गिनती होगी।
दक्षिण भारत में कर्नाटक ही अकेला राज्य है, जहां BJP सत्ता में है। पार्टी के लिए यहां की सत्ता बरकरार रखना और अपनी जीत की लय को बनाए रखना इस साल के आखिर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के हिंदी पट्टी के राज्यों में होने वाले चुनावों के मद्देनजर अहम होगा।
PTI के मुताबिक, चुनावों से कुछ महीने पहले, कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के कथित भ्रष्टाचार को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया था। उसने बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली सरकार पर 40 प्रतिशत कमीशन वाली सरकार का आरोप लगाया। इसकी काट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान को हथियार बनाकर कांग्रेस सरकारों पर '85 प्रतिशत वाली कमीशन सरकार' होने का पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिल्ली से एक रुपया निकलता है, तो लोगों तक पहुंचते-पहुंचते वह 15 पैसे रह जाता है।
BJP राज्य में 2018 में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन बहुमत से दूर रह गई थी। इसके बाद जनता दल (सेक्युलर) JD(S) और कांग्रेस ने हाथ मिलाया और एच डी कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री बने।
ये सरकार लंबे समय तक नहीं टिक सकी। बीजेपी ने जुलाई 2019 में कांग्रेस और JD(S) के 17 विधायकों की मदद से सरकार बनाई। इन विधायकों ने इस्तीफा दे दिया और BJP के साथ हाथ मिला लिया।
BJP के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कर्नाटक में अपने चुनावी अभियान के दौरान 19 जनसभाओं को संबोधित किया और छह रोड शो किए।
BJP ने केंद्र से अपने सभी शीर्ष नेताओं- अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ और निर्मला सीतारमण, और योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश) समेत कई बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चुनाव प्रचार के लिए उतारा।
पार्टी ने 75 नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारा और अपने चुनावी घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने का वादा किया और प्रचार के दौरान ‘डबल इंजन’ सरकार के फायदों को रेखांकित किया।
कांग्रेस की तरफ से सत्ता में आने पर बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के वादे को बीजेपी ने भगवान ‘हनुमान’ के अपमान से जोड़ा और इसे चुनावी मुद्दा बनाने की भरपूर कोशिश की।
मोदी ने प्रस्तावित प्रतिबंध की तुलना हनुमान को ही बंद करने से की। उन्होंने कांग्रेस की तरफ से अपना घोषणापत्र जारी करने के बाद अपने सभी भाषणों में ‘जय बजरंग बली’ का नारा लगाया।