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जानिए 1970 में क्यों देश के राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होना पड़ा था!

साल 1969 में राष्ट्रपति पद का चुनाव हुआ था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस पद के लिए पार्टी फोरम पर पहले नीलम संजीव रेड्डी का नाम सुझाया था। लेकिन, बाद में उन्हें लगा कि रेड्डी स्वतंत्र विचार के व्यक्ति हैं और उनकी हर बात नहीं मानेंगे तो इंदिरा जी ने निर्दलीय उम्मीदवार वीवी गिरि का समर्थन कर दिया

Surendra Kishoreअपडेटेड Nov 26, 2023 पर 2:33 PM
जानिए 1970 में क्यों देश के राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होना पड़ा था!
1970 में तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि सुप्रीम कोर्ट में हाजिर हुए थे

राष्ट्रपति पद के लिए वीवी गिरि के 1969 में चुने जाने के खिलाफ याचिका दायर की गयी तो महामहिम गिरि अपना बयान दर्ज कराने के लिए खुद सुप्रीम कोर्ट में हाजिर हो गये थे। ऐसा करके राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के सम्मान और महत्व का एहसास लोगों को दिलवा दिया था। हालांकि राष्ट्रपति के गरिमापूर्ण पद को ध्यान में रखते हुए उससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति का बयान दर्ज करने के लिए कमिश्नर बहाल कर दिया था।

पर जब गिरि ने खुद हाजिर होकर बयान देना उचित समझा तो उधर सुप्रीम कोर्ट ने भी राष्ट्रपति के बैठने की सम्मानजनक व्यवस्था कर दी। 1970 में तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि सुप्रीम कोर्ट में हाजिर हुए थे। याद रहे कि साल 1969 में राष्ट्रपति पद का चुनाव हुआ था। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस पद के लिए पार्टी फोरम पर पहले नीलम संजीव रेड्डी का नाम सुझाया था।

लेकिन, बाद में उन्हें लगा कि रेड्डी स्वतंत्र विचार के व्यक्ति हैं और उनकी हर बात नहीं मानेंगे तो इंदिरा जी ने निर्दलीय उम्मीदवार वीवी गिरि का समर्थन कर दिया। इंदिरा गांधी ने अपने दल के सांसदों और विधायकों यानी मतदाताओं से अपील कर दी कि वे अपनी "अंतरात्मा की आवाज" पर वोट दें। इस सवाल पर कांग्रेस में फूट पड़ गई। कुछ अन्य दलों की मदद से इंदिरा गांधी ने श्री गिरि को विजयी बनवा दिया। बाद में वीवी गिरि के चुनाव को चुनौती देते हुए याचिका दायर कर दी गई।

याचिका में मुख्य आरोप यह लगा कि राष्ट्रपति के चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे परचे छापे और वितरित किये गये जो संजीव रेड्डी के चरित्र को लांछित करते थे। रेड्डी कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार थे। इस मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एसएम सिकरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पीठ का गठन हुआ। मुकदमा लगातार सोलह सप्ताह तक चला। सी के दफ्तरी गिरि के वकील थे। मुकदमे में 116 गवाहों के बयान हुए। इक्कीस दस्तावेज पेश किये गये।

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