राष्ट्रपति पद के लिए वीवी गिरि के 1969 में चुने जाने के खिलाफ याचिका दायर की गयी तो महामहिम गिरि अपना बयान दर्ज कराने के लिए खुद सुप्रीम कोर्ट में हाजिर हो गये थे। ऐसा करके राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के सम्मान और महत्व का एहसास लोगों को दिलवा दिया था। हालांकि राष्ट्रपति के गरिमापूर्ण पद को ध्यान में रखते हुए उससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति का बयान दर्ज करने के लिए कमिश्नर बहाल कर दिया था।
