फ्रांस के मशहूर भविष्यवक्ता ने सोलहवीं सदी में ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि भारत में एक ऐसा नेता पैदा होगा जो भूत काल में उत्पन्न हुए असाधारण दैवी गुणों से लैस राजाओं को भी पीछे छोड़ देगा। हिंदुओं का यह भावी नेता भारत के सभी अन्य राजाओं में बढ़-चढ़कर होगा। नास्त्रेदमस ने सन 1555 से लेकर 3797 तक के लिए अनेक भविष्यवाणियां की थीं।
नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां किताबों में संग्रहित हैं। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों वाली पुस्तक हिन्दी में भी उपलब्ध है। उनकी अनेक भविष्यवाणियां सच साबित हो चुकी हैं। उन्होंने संकेतों की भाषा में अपनी भविष्यवाणियां चतुष्पदियों में लिखी है। भारत के बारे में उनकी इस भविष्यवाणी के बारे में अपने देश में अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं।
उस भविष्यवाणी के अनुसार, "दुनिया के पूरब में तीन सागरों से घिरे देश में एक ऐसा प्राणी जन्म लेगा जो बृहस्पति वार को गुरू मान कर उपासना करेगा। वह प्राणी इतना महान और शक्तिशाली होगा कि वह तूफान की तरह पूरे विश्व पर छा जाएगा।" इस भविष्यवाणी को भारत से जोड़कर देखने वाले यह भी बताते हैं कि दुनिया में हिंदू ही एक ऐसा धर्म है जो बहस्पति को गुरू मानता है।
इस भविष्यवाणी पर विस्तार से कुछ कहने से पहले नास्त्रेदामस के बारे में कुछ और बातें कर ली जाएं। नास्त्रेदमस ने अपने बारे में सन 1556 में लिखा था कि "मैं इस संसार का सबसे बड़ा पापी और मनःस्ताप का उत्तराधिकारी हूं। किंतु समाधिमग्न कार्य में अनेक अवसरों पर विस्मित होने के कारण, लंबी-लंबी गणनाओं के मध्य और आध्यात्मिक गुणों की मीठी सुगंध की रात्रि वंदना में व्यस्त होने के कारण मैंने भविष्यवाणियों की रचना की है। इन पदों के अध्ययन करने वाले महानुभाव परिपक्व बुद्धि से आकलन करें। अधार्मिक , अनास्था वाला समुदाय, नीम हकीम ज्योतिषी, अयोग्य, अकुशल, अध कचरे समीक्षक इससे दूर रहें।"
नास्त्रेदमस ने आगे कहा है, " यद्यपि मैं चाहता तो प्रत्येक चतुष्पदी में उसकी विस्तृत तारीखें आसानी से दी जा सकती थीं। किंतु सभी लोगों को मेरा यह कार्य स्वीकार नहीं हो पाता। नास्त्रेदमस की भारत से संबंधित भविष्यवाणियों के समानांतर प्राचीन भारतीय ग्रंथों में भी अवतारों के बारे में वर्णन मिलते हैं। महाभारत के वन पर्व में कल्कि अवतार का विवरण है। करीब पांच हजार साल पहले की गई वे भविष्यवाणियां इस प्रकार हैं।"
एक समय ऐसा आएगा जब आम लोग इतने पतित हो जाएंगे कि वे बुद्धिजीवियों और ब्राह्मणों को भी लूटने में संकोच नहीं करेंगे। ब्राह्मण लोग भी कर्म कांड छोड़ कर पथ भ्रष्ट होकर नीच कर्म करने में संकोच नहीं करेंगे। चारों ओर माया जाल में फंसे लोग धर्म कर्म को भूल जाएंगे। चारों ओर झूठ ,पाप,धोखे ,स्वार्थ के सिवा कुछ नजर नहीं आएगा।भाई भाई के खून का प्यासा होगा। तभी कल्कि अवतार होगा।
नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों के एक भाष्यकार नरेंद्र शर्मा लिखते हैं कि जरा महा भारत काल की भविष्यवाणियां देखिए और साथ -साथ अब नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी को देखिए। दोनों में मेल है। नरेंद्र शर्मा के अनुसार दोनों के विचार में सबसे बड़ी समानता तो यह है कि दोनों ही इस बारे में एकमत हैं कि भारत की धरती पर ही किसी ऐसे महा पुरुष का जन्म होगा जो अपनी महा शक्ति से विश्व के सब पापियों का सर्वनाश करेगा। भले वह महाभारत का कल्कि अवतार हो या फिर नास्त्रेदामस का वह महापुरुष।
नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी के जरिए यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भारत में पैदा होने वाला वह महा पुरुष क्रिश्चियन नहीं होगा। वैसे भी बृहस्पति की पूजा केवल हिंदू धर्म में ही होती है। पर ऐसे महापुरुष का अवतरण कब होगा, इस संबंध में नास्त्रेदामस मौन हैं। कई लोग यह भी दावा करते हैं कि उस महापुरुष का जन्म हो चुका है और वह अपने ढंग से इस काम में लग भी चुका है। पर यह तो अटकलबाजी ही है।
भारत में इन दिनों जिस तरह चीजें बिगड़ती जा रही हैं,उसको सुधारने की उम्मीद भी खत्म हो जाती है।कई लोग यह भी कहते सुने जाते हैं कि इस देश को तो अब भगवान ही बचा सकता है। इस विषम स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि शायद कोई न कोई अवतार हो जाए। आज से कुछ सौ वर्षों के बाद उस समय के लोग शायद गांधी को भी एक अवतार ही मान लें। थोड़ा पीछे जाकर इस बात की जरा कल्पना कीजिए कि महात्मा गांधी ने इस देश की कितनी बड़ी
अनेक लोग तब कहा करते थे कि जिस अंग्रेज के शासन में सूर्य नहीं डूबता है, उसे ताली बजा कर गांधी कैसे भगा सकेंगे? पर उन्होंने आखिरकार उन फिरंगियों को भगा ही दिया। आज भारत के सामने सबसे बड़ी समस्या सरकारी-गैर सरकारी भ्रष्टाचार व शासनहीनता का है। कभी अंग्रेज इस देश को लूटा करते थे, अब देसी अंग्रेज यानी देशद्रोही इस देश को लूट कर विदेशी बैंकों में धन जमा कर रहे हैं। इनसे जो भी हस्ती लड़कर इन्हें पराजित कर देगी, उसे अवतार ही तो कहेंगे।
आज के तो अधिकतर सत्तासीन लोगों में से कुछ लोग जाति के हाथों मजबूर हैं, तो कुछ क्षेत्र के तो कुछ स्वार्थ के हाथों। कुछ निपट सत्ता लोलुप हैं तो कुछ अपने दलीय सुप्रीमो के सामने लाचार। कई लोगों को एक अवतार का इंतजार है। शायद नास्त्रेदामस और महाभारत की भविष्यवाणी कभी सच हो जाए !