Punjab Election Results 2022: क्रिकेट की पिच हो या हंसी का मंच नवजोत सिंह सिद्धू ने हमेशा सुर्खियां बटोरी है। हंसी के मंच पर अपने शब्दभेदी बाण से सबको हंसाते नजर आते हैं। सियासी गलियारे में भी वो किसी स्टार से कम नहीं है। लेकिन आम आदमी पार्टी की आंधी में कॉमेडी के बादशाह नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) अपना वजूद नहीं बचा सके। जनता ने भी उनके साथ बड़ी कॉमेडी कर दी। अब पंजाब के सियासी गलियारे में सिद्धू खुद ही हंसी के पात्र बन चुके हैं।
आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) की उम्मीदवार जीवन ज्योत कौर ने उन्हें सियासी जमीन पर धूल चटा दी है। पंजाब मॉडल, करतारपुर कॉरिडोर खोलने में उनकी भूमिका और कैप्टन अमरिंदर सिंह को सत्ता से हटाने के कारण उनकी खासी भूमिका रही लेकिन इससे उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।
सियासी पिच से कैसे आउट हुए सिद्धू
सिद्धू को ड्रग माफिया और बेअदबी के मामलों में न्याय के लिए स्टैंड लेने से भी उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ। सुखबीर बादल के बहनोई बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ ड्रग के एक पुराने मामले में चन्नी सरकार ने FIR दर्ज की जो बाद में सिद्धू के गले की फांस ही बन गई। दूसरा उनकी बेवाक भाषा भी उनके हारने का कारण बनी है। सिद्धू पर हमेशा उनकी ही बयानबाजी भारी पड़ जाती है। किसी भी मामले में हो उनका इस्तीफा हमेशा तैयार रहता है। इसके साथ ही अहंकार से लबालब भरे सिद्धू को जनता ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। उनका विवादों से हमेशा पुराना नाता रहा है।
सिद्धू जनता से बहुत कम मिलते हैं
सिद्धू अपनी ही पार्टी के नेताओं को बेवकूफ और खुद को एक विद्वान साबित करने की कोशिश में लगे रहते हैं। उनके क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सिद्धू आम जनता से बहुत कम मिलते हैं। इतना ही नहीं, लोगों का यहां तक कहना है कि अगर उनसे कोई मिलने चला भी जाता है, तो उसे चाय तक के लिए नहीं पूछते थे। सिद्धू मालवा इलाके के जाट सिख हैं, लेकिन माझा उनकी कर्मभूमि है। वहीं हिंदू रीति-रिवाजों के मानने के चलते शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ हिंदुओं में भी उनकी अच्छी पकड़ थी। फिर भी वो अपना जनाधार खो बैठे। कुल मिलाकर सियासी खेल में वो भी AAP की आंधी के शिकार हो गए।