उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटाने वाले पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ही प्रदेश में अगली सरकार के मुखिया होंगे। पुष्कर सिंह धामी कल 23 मार्च को दोपहर 3.30 बजे दूसरी बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। धामी के साथ नई कैबिनेट को भी शपथ दिलाई जाएगी। ये शपथ ग्रहण समारोह देहरादून के परेड ग्राउंड में होगा।
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड के लिए लगातार बहुत सारे क्षेत्रों में काम हुआ है, चुनाव से पहले हमने जो संकल्प किए हैं उनको धरातल पर ले जाएंगे। एक अच्छी सरकार देंगे जो उत्तराखंड को हिन्दुस्तान का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए काम करेगी।
देहरादून स्थित बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में सोमवार को पर्यवेक्षक और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा सह पर्यवेक्षक एवं विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी की मौजूदगी में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में धामी को सर्वसम्मति से उसका नेता चुना गया था।
अपने सीट से हार गए थे धामी
हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 70 में से 47 सीटों पर जीत हासिल कर दो-तिहाई से अधिक बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्तासीन हो रही है। हांलांकि, 'उत्तराखंड फिर मांगे, मोदी-धामी की सरकार' के नारे के साथ विधानसभा चुनाव लडने वाली बीजेपी को जीत तक ले जाने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी परंपरागत सीट खटीमा से हार गए।
इस कारण नेतृत्व को मुख्यमंत्री के नाम पर नए सिरे से मंथन करना पड़ा, जिसमें लगभग 11 दिन का वक्त लग गया। पुष्कर सिंह धामी को अब 6 महीने के अंदर चुनाव जीतकर विधायक बनना होगा। अपने नाम की घोषणा के बाद धामी ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदेश बनाएंगे।
हारकर भी बाजीगर साबित हुए धामी
46 वर्षीय धामी के बुधवार 23 मार्च को दूसरी बार शपथ लेने के साथ ही 22 साल पहले अस्तित्व में आए उत्तराखंड में एक और मिथक यह भी टूटेगा कि किसी भी मुख्यमंत्री ने लगातार दो बार अपनी पारी नहीं खेली। पिछले साल जुलाई में धामी को विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले ही प्रदेश की बागडोर सौंपी गयी थी और पार्टी नेतृत्व के भरोसे पर वह खरे उतरे।
धामी ने जब पिछले साल जुलाई में कार्यभार संभाला था तब वह प्रदेश के इतिहास में सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे और उनके सामने कोरोना महामारी और आपदाओं के साथ ही नजदीक आते विधानसभा चुनाव जैसी कई चुनौतियां थीं और खुद को साबित करने के लिए मात्र छह महीने थे।
कोरोना महामारी के चलते पटरी से उतरी अर्थव्यवस्था, तीर्थ पुरोहितों का चारधाम बोर्ड को लेकर आंदोलन और कोविड फर्जी जांच घोटाला जैसी चुनौतियां भी उनके सामने थीं। उन्होंने कई आर्थिक पैकेजों की घोषणा और चारधाम बोर्ड भंग कर जीत हासिल की और ऐन विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष के हाथ से मुददे छीन लिए।
धामी महाराष्ट्र के राज्यपाल और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के करीबी माने जाते हैं और उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान वह उनके विशेष कार्याधिकारी थे। माना जाता है कि छात्र राजनीति से जुड़े रहे धामी को राजनीति के क्षेत्र में उंगली पकडकर कोश्यारी ही लाए।