Get App

डकैत भूपत सिंह की कहानी जिसने राजाओं के इशारे पर देश के पहले आम चुनाव में मचाई थी हिंसा

आजादी के बाद सभी राज्यों का विलय भारत में किया गया जो उन राज्यों के राजाओं को पसंद नहीं आ रहा था। लिहाजा राजाओं ने मिलकर भूपत सिंह डकैत को पैसा दिया और उसे भारत के पहले आम चुनाव को प्रभावित करने को कहा था. जानिए क्या है ये पूरी कहानी

Surendra Kishoreअपडेटेड Jul 09, 2023 पर 12:29 PM
डकैत भूपत सिंह की कहानी जिसने राजाओं के इशारे पर देश के पहले आम चुनाव में मचाई थी हिंसा
क गांधीवादी परिवार पर किस तरह भूपत डकैत ने अत्याचार किया, उसका विवरण भी पुस्तक में दर्ज है

काठियावाड़ की देसी रियासतों के राजा-महाराजाओं ने भारत सरकार से बदला लेने के लिए इस देश में डकैतों से अव्यवस्था फैलवाई थी। आजादी के तत्काल बाद की ये घटनाएं हैं। भारतीय संघ में विलय का बदला लेने के लिए उन राजाओं ने ऐसा किया था। पर,अंततः वे सफल नहीं हुए। दीवान जरमनी दास की किताब "महाराजा" में इन घटनाओं को विवरण मौजूद है। आजादी के समय कई रजवाड़े संघ में विलय नहीं चाहते थे।

लेकिन, विलय तो हो गया। उससे नाराज रजवाड़ों ने उस समय के कुख्यात डकैत भूपत की मदद ली। वह करीब 70 से अधिक हत्याएं कर चुका था। भूपत ने पूर्व राजाओं के कहने पर खूब उत्पात मचाया। पर, पुलिस का दबाव बढ़ने पर भूपत पाकिस्तान भाग गया। रजवाड़ों ने ही उसे सरहद पार कराने में मदद की। जमींदारों के उकसावे पर उस डकैत गिरोह ने गांधीवादियों को भी निशाना बनाया था।

उन दिनों पुलिस सेवा (IP) के एक बड़े और मशहूर पुलिस अफसर थे अश्विनी कुमार। इस अफसर की जीवट और मर्दानगी के कारण ही कुख्यात भूपत को पाकिस्तान खदेड़ा जा सका। दीवान जरमनी दास लिखते हैं कि "उससे पहले अपने संरक्षकों की इच्छा का पालन करते हुए भूपत डाकू ने ऐसा आतंक फैलाया कि पूरे सौराष्ट्र का इलाका अस्तव्यस्तता के कारण भारत का सर्वाधिक खतरनाक इलाका समझा जाने लगा।"

रजवाड़े और जागीरदार भूपत को रुपये-पैसे देते थे। और, गिरोह इलाके में लूट-मार, कत्ल और आग लगाने का काम कर रहा था। लेखक के अनुसार कुछ पूर्व रजवाड़े और जागरीदार ने उससे प्रसन्न हाकर भूपत को बहुत धन दिया। भूपत गिरोह के रोज का खर्च तीन सौ रुपए था। भूपत के पाकिस्तान भाग जाने के बाद सौराष्ट्र की सरकार ने भूपत के संरक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। भूपत को उकसा कर लूटपाट करवाने वाले ग्यारह रजवाड़े और उनके अनुचर गिरफ्तार किए गए। गिरफ्तार लोगों में वे भी शामिल थे जिन्होंने भूपत को पाकिस्तान भागने में मदद की।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें