उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन दशक से पुराने एक अंधविश्वास को तोड़ दिया है। अंधविश्वास यह था कि अगर राज्य के मुख्यमंत्री ने नोएडा को दौरा किया तो वह दोबारा सीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंचेगा। योगी 2017 में पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री बने। उसके बाद से उन्होंने करीब दो दर्जन बार नोएडा का दौरा किया। अब वह दोबारा सीएम बनने जा रहे हैं।
योगी ने नोएडा में अब तक कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। वह गोरखपुर शहरी सीट से विधानसभा चुनाव भी जीतने जा रहे हैं। इस अंधविश्वास को तोड़ने के बारे में योगी कहते हैं, "वे डर रहे थे। उनकी अपनी जिंदगी और राजनीतिक ताकत ही उनके लिए सबकुछ थी। उनके पास राज्य को समृद्ध बनाने का कोई कार्यक्रम नहीं था। इसलिए वे नोएडा का दौरा करने से डरते थे।"
गौतम बुद्ध जिले से भी भाजपा के उम्मीदवार जीतते दिख रहे हैं। अगर पिछले कुछ सालों को देखें तो यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मार्च 2007 में सीएम पद की शपथ ली थी। वह शादी के एक समारोह में हिस्सा लेने के लिए उस साल नवंबर में नोएडा गई थीं। तब उनकी नोएडा की यात्रा को साहसिक बताया गया था। लेकिन, 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में वह दोबारा सत्ता में लौटने में नाकाम रहीं।
यूपी में पहली विधानसभा 20 मई, 1952 को वजूद में आई थी। तब से अब तक के 70 साल में यूपी को 21 मुख्यमंत्री मिले। लेकिन, योगी आदित्यनाथ पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपना पांच साल का पहला कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा मुख्यमंत्री बनने के करीब हैं। यह उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को देखते हुए बड़ी उपलब्धि है।
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी नोएडा जाने से बचते रहे। साल 2012 में हुए विधानसभा चुनावों में सपा सत्ता में आई थी। अखिलेश यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने भी नोएडी का यात्रा करने से परहेज किया। उन्होंने नोएडा में 2013 में आयोजित एशियाई विकास बैंक की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।
इस साल जनवरी में योगी ने कोरोना की स्थिति की एक समीक्षा बैठक में हिस्सा लेने के लिए नोएडा का दौरा किया था। नोएडा से चुनाव लड़ रहे भाजपा नेता पकंज सिंह, धीरेंद्र सिंह और तेजपाल सिंह अपनी-अपनी सीटों से जीतते दिख रहे हैं।