West Bengal Panchayat Elections 2023: पश्चिम बंगाल के कूचबिहार ( Cooch Behar) जिले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की रैली के अगले ही दिन मंगलवार सुबह राज्य में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दो गुटों के बीच हुई हिंसक संघर्ष में एक की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों गुटों में गोलीबारी भी हुई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। तृणमूल के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाए हैं। जबकि पुलिस का कहना है कि TMC के लोग ही आपस में भिड़ गए।
SP सुमित कुमार ने बताया कि कूचबिहार के गीतलदाहा में आज सुबह दो गुटों के बीच झड़प हो गई। जानकारी के मुताबिक 5 लोगों को गोली लगी है, जिनमें से एक बाबू हक नामक व्यक्ति की मृत्यु हो गई है। स्थिति शांतिपूर्ण है। पुलिस मौके पर मौजूद है। बता दें कि बंगाल में 8 जुलाई को पंचायत चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। मतदान से पहले राज्य में हिंसा जारी है। नामांकन के दौरान कई जगहों से हिंसा की खबरें सामने आई हैं, जिसमें कई लोग बुरी तरह से घायल हो गए।
ममता का BSF पर गंभीर आरोप
इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) BJP के इशारे पर राज्य के सीमावर्ती इलाकों में मतदाताओं को डराने का काम कर रहा है। हालांकि, बीएसएफ ने इस आरोप का खंडन करते हुए इसे निराधार बताया। बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीएसएफ का निर्दोष ग्रामीणों पर गोलियां चलाना निंदनीय है। पुलिस से उसकी गतिविधियों पर नजर रखने को भी कहा है।
पिछले साल ग्रामीणों पर BSF की कथित गोलीबारी का जिक्र करते हुए बनर्जी ने कहा कि पुलिस ऐसे मामलों में FIR दर्ज करेगी और कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी को गोली मारने का अधिकार नहीं है। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। ऐसा लगता है कि कूचबिहार जिले में लोगों को मारना एक आम बात हो गया है। बीएसएफ ने जिन पर गोलियां चलायी थीं, उनके बारे में उसने तस्कर होने का दावा किया था।
BSF गुवाहाटी फ्रंटियर ने एक बयान में कहा कि यह बताना है कि कूचबिहार में एक रैली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने बीएसएफ पर जो आरोप लगाए हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद एवं सत्य से परे हैं। बयान में कहा गया कि बीएसएफ एक पेशेवर बल है जिसे भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा की चौकसी करने का जिम्मा मिला है। उसने किसी भी सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों या मतदाताओं को किसी भी वजह से कभी नहीं डराया-धमकाया।
बयान में आगे कहा गया है कि BSF कर्मियों को भी चुनाव ड्यूटी में लगाया जाता है और वे स्थानीय प्रशासन की निगरानी में अपना काम करते हैं। BJP ने भी राजनीतिक मकसद के लिए बीएसएफ का इस्तेमाल करने के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया।
बता दें कि BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 2021 में बीएसएफ अधिनियम में संशोधन किया था ताकि बल को पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किमी के बजाय 50 किमी के दायरे में तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी करने के लिए अधिकृत किया जा सके।