2005 में टीवी पर घूस लेते 11 सांसदों को पूरे देश ने देखा था। नतीजतन पहले तो वे सांसद निलंबित हुए। फिर संसद ने प्रस्ताव पास कर उनकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी। इस शर्मनाक घटना की हर तरफ निंदा हुई। तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री और सोमनाथ चटर्जी लोकसभा के स्पीकर थे। सदस्यता गंवाने वाले सांसद कांग्रेस, भाजपा, बसपा और राजद के सदस्य थे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि लोकतंत्र में संसद की विश्वसनीयता बनाए रखने से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
