मध्य प्रदेश के स्पष्टवादी मुख्यमंत्री द्वारिका प्रसाद मिश्र ने पूर्व राज घरानों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अमर्यादित टिप्पणी की जिससे गुस्सा कर राजमाता सिंधिया ने 1967 में उनकी सरकार गिरवा दी। ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू राजनीति में लेकर आए था। कांग्रेस के टिकट पर वह 1957 और 1962 में लोकसभा सदस्य बनीं। सन 1967 में स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर लोक सभा सदस्य चुनी गयीं। बाद में वह जनसंघ में शामिल हो गयीं।
