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जब नेहरू को विमान से चुनाव प्रचार करने के लिए लेनी पड़ी थी इजाजत

तब CAG ने कहा था कि खास परिस्थिति में जवाहर लाल नेहरू सही किराया देकर वायु सेना के विमान का इस्तेमाल कर सकते हैं। CAG से नीति विषयक राय मांगने के पीछे जवाहर लाल नेहरू की भी यही मंशा थी कि CAG सरकार की सिर्फ मुनीम नहीं है

Surendra Kishoreअपडेटेड Feb 13, 2023 पर 8:05 AM
जब नेहरू को विमान से चुनाव प्रचार करने के लिए लेनी पड़ी थी इजाजत
विमान की सुविधा उपलब्ध हो जाने के बावजूद प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू को छह महीने के चुनाव प्रचार के दौरान रेलगाड़ी से 1612 मील की चुनावी यात्रा करनी पड़ी

देश के पहले आम चुनाव के प्रचार के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कार और ट्रेन कौन कहे, नावों से भी लगभग 90 मील की यात्राएं की थीं। देश भर में चुनाव संपन्न कराने में तब छह महीने लगे थे। यातायात के लचर साधनों के बीच प्रधानमंत्री ने ट्रेन से 1612 मील की चुनावी यात्राएं की थीं। नेहरू ने 18,348 मील की चुनावी यात्रा विमान से की थी। लेकिन प्रधानमंत्री पद पर रहने के बावजूद उन्हें अपने लिए प्लेन का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा था। तब उनका यह काम CAG ने आसान कर दिया था।

उस चुनाव से पहले ऐसी कोई परंपरा नहीं थी कि प्रधानमंत्री इस काम के लिए सरकारी विमान का इस्तेमाल करें। इस पर खुद जवाहर लाल नेहरू ने इस मामले में CAG से राय मांगी थी। लेकिन तब CAG ने कहा था कि खास परिस्थिति में जवाहर लाल नेहरू सही किराया देकर वायु सेना के विमान का इस्तेमाल कर सकते हैं। CAG से नीति विषयक राय मांगने के पीछे जवाहर लाल नेहरू की भी यही मंशा थी कि CAG सरकार की सिर्फ मुनीम नहीं है।

खुद जवाहर लाल भी संविधान सभा के सदस्य थे और वह CAG की भूमिका के बारे में संविधान सभा की राय जानते थे। सन 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि CAG सरकारों का कोई मुनीम नहीं है। वह एक सवैधनिक संस्था है और उसे केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और केंद्र शासित राज्यों से जुड़े राजस्व आवंटन पर लेखा परीक्षण करने और उसकी समीक्षा करने का भी अधिकार है। देश का पहला आम चुनाव 1951 के अक्टूबर और दिसंबर तथा फरवरी 1952 में हुआ था।

जवाहर लाल नेहरू कांग्रेस के सबसे बड़े और सबसे लोकप्रिय नेता थे। उन्हें पूरे देश में चुनाव प्रचार करना था। उसके लिए विमान जरूरी था। सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर इस सवाल पर काफी माथापच्ची हुई थी। इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक ने चुनाव से कुछ महीने पहले प्रधान मंत्री के निजी सचिव एम.ओ.मथाई से कहा कि अगले आम चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधान मंत्री की सुरक्षा को लेकर हम चिंतित हैं। जवाहर लाल नेहरू की जान पर खतरा बरकरार है। निदेशक ने कहा कि हमें चिंता होगी, यदि प्रधान मंत्री नियमित कमर्शियल फ्लाइट से यात्रा करके चुनाव प्रचार करेंगे।

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