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कांग्रेस का एकाधिकार खत्म करने के लिए जब विपक्ष ने दिखाई थी एकता

1947 से 1967 तक कांग्रेस का सत्ता पर एकाधिकार था जिसे खत्म करने के लिए सभी विपक्षी दलों ने 1967 में मिलकर चुनाव लड़ा और सात राज्यों में विजय हासिल की

Surendra Kishoreअपडेटेड Sep 25, 2023 पर 6:08 PM
कांग्रेस का एकाधिकार खत्म करने के लिए जब विपक्ष ने दिखाई थी एकता
डॉक्टर लोहिया चाहते थे कि गैर कांग्रेसी नेताओं की साख कांग्रेसी नेताओं से बेहतर हो ताकि जनता उन पर कांगेस की अपेक्षा अधिक भरोसा कर सके

1967 में गैर कांग्रेसी दलों ने सात राज्यों में जीत हासिल की थी। विपक्षी दलों का उद्देश्य तब सिर्फ सत्ता पाना नहीं बल्कि कांग्रेस का एकाधिकार तोड़ना था। गैर कांग्रेसी दलों के नेतागण तब यह कह रहे थे कि एकाधिकार मिल जाने के कारण कांग्रेस जन समस्याओं के प्रति लापरवाह हो चुकी है। 1967 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस का बहुमत कम हो गया था। और ये मुमकिन हुआ विपक्षी दलों की चुनावी एकता के कारण संभव हुआ।

यदि विपक्ष के बीच तब एकता कुछ और मजबूत होती तो संभवतः केंद्र में भी गैर कांग्रेसी सरकार उसी समय ही बन गई होती। केंद्र में पहली गैरकांग्रेसी सरकार तो सन् 1977 में ही बन सकी।

सन 1966 में इन गैर कांग्रेसी सरकारों का नक्शा तैयार किया था स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी विचारक डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने। उन्होंने ऐसा चमत्कार किया कि CPI और जनसंघ के नेतागण भी तब एक से अधिक राज्य सरकारों में साथ- साथ मंत्री बन गए थे।

उन दिनों गठबंधन की सरकारें अपनी ‘सत्ता’, दबदबा और निजी संपत्ति के लिए नहीं, बल्कि आम जनता की स्थिति में परिवर्तन करने के लिए बनी थीं।जितने दिनों तक रहीं, पहले की सरकारों की अपेक्षा बेहतर काम किया। लेकिन वे राज्य सरकारें कुछ दलों के नेताओं की महत्वाकांक्षा के कारण समय से पहले गिर गयीं।

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