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पूर्ण बहुमत वाली हो या फिर मिलीजुली सरकार, कभी भी गिर सकती है

आजादी के बाद के प्रथम पांच चुनावों में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिला था। सरकारें चलती रहीं। आपातकाल में सन 1976 में लोक सभा की आयु एक साल बढ़ा दी गयी थी। सन 1989 से इस देश में राजनीतिक अस्थिरता का दौर चला। राज्यों में तो यह दौर सन 1967 के बाद से ही चल पड़ा था। केद्र में सन 1984 के बाद पहली बार 2014 और 2019 में किसी दल को लोक सभा में पूर्ण बहुमत मिला। 2014 की मोदी सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया

Surendra Kishoreअपडेटेड Aug 27, 2023 पर 12:41 AM
पूर्ण बहुमत वाली हो या फिर मिलीजुली सरकार, कभी भी गिर सकती है
कई बार तो बहुमत वाली सरकारों ने भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया। सन 1967 और सन 1977 इसके उदाहरण हैं

केंद्र में सन 1967 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी थी। पर, कांग्रेस में महाविभाजन के कारण सन 1969 में वह सरकार अल्पमत में आ गयी। सन 1971 में लोक सभा का मध्यावधि चुनाव कराना पड़ा था। सन 1977 में भी जनता पार्टी के मोरारजी देसाई के नेतृत्व में केंद्र में पूर्ण बहुमत वाली एक दलीय सरकार बनी थी। पर, वह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी थी। और सन 1980 में लोक सभा का मध्यावधि चुनाव कराना पड़ा।

लेकिन, सन 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की मिलीजुली सरकार बनी। फिर भी उस सरकार ने अपना पूरा कार्यकाल पूरा किया। यानी, स्थायित्व के मामले में मिलीजुली सरकारों का अनुभव भी मिला-जुला रहा है। वैसे हर लोक सभा चुनाव से पहले यह आशंका जाहिर की जाती है कि यदि सरकार मिलीजुली बनेगी तो उसके स्थायित्व के बारे में कोई गारंटी नहीं। याद रहे कि सन 2024 में लोक सभा का चुनाव होने वाला है। विभिन्न दलों के गठजोड़ से बनी सरकारों ने चार दफा अपना कार्यकाल पूरा किया। तो अन्य मामलों में इतने ही दफा समय से पहले सरकारें गिर गईं।

एक बार फिर 2024 के चुनाव के बाद मिली जुली सरकार बनने की जब संभावना जाहिर की जा रही है तो उसके स्थायित्व को लेकर भी अभी से ही सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में पिछले रिकॉर्ड देख लेना दिलचस्प होगा। अब तक इस देश में लोक सभा के 16 चुनाव हो चुके हैं। यदि सभी सरकारों ने अपने कार्यकाल पूरे किए होते तो अब तक मात्र 15 चुनाव होने चाहिए थे। अधिकतर मतदाता यही चाहते हैं कि पूर्ण बहुमत की सरकार बने ताकि सरकार बीच में न गिरे और अनावश्यक चुनावों की नौबत न आए। अब देखना है कि आगे क्या होता है !

कई बार तो बहुमत वाली सरकारों ने भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया। सन 1967 और सन 1977 इसके उदाहरण हैं। सन 1969 में कांग्रेस के महा विभाजन के बाद तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की सरकार अल्पमत में आ गयी थी। CPI और द्रमुक जैसे कुछ दलों ने सरकार को बाहर से समर्थन किया और सरकार चली। पर इंदिरा गांधी ने यह महसूस किया कि उन्हें दबाव में काम करना पड़ रहा है। नतीजतन उन्होंने समय से एक साल पहले ही लोक सभा का मध्यावधि चुनाव सन 1971 में करवा दिया।

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