अफ्रीकी देश गाम्बिया (Gambia) में मिलावटी कफ सिरप सप्लाई करने के आरोपों में घिरी भारतीय कंपनी मेडेन फार्मास्युटिकल्स (Maiden Pharmaceuticals) के खिलाफ शुरुआती जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने दवाओं को बनाने से गुड्स मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) में कई गंभीर चूक की है।
इस रिपोर्ट को देश की शीर्ष ड्रग रेगुलेटर, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने हरियाणा के स्टेट ड्रग अथॉरिटीज के साथ मिलकर तैयार किया है। मामले से वाकिफ चार सरकारी सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि CDSCO की तरफ से तैयार की गई इस रिपोर्ट को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में भेजा जा चुका है।
हालांकि कप सिरप के संदिग्ध खेपों में मिलावट की जांच के लिए भेजे गए नमूनों के नतीजों का अभी इंतजार है। मनीकंट्रोल ने इस रिपोर्ट की एक कॉपी देखी है।
बता दें कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने पिछले हफ्ते मेडेन फार्मा की चार कफ सिरप को लेकर अलर्ट जारी किया था और कहा था कि इस कफ सिरप को पीने से गाम्बिया में कथित तौर पर 66 बच्चों की मौत हुई है। इन सिरप को मेडेन फार्मा के हरियाणा स्थित प्लांट में बनाया गया था।
गाम्बिया में कफ सिरप को लेकर सवाल उठने के बाद CDSCO और हरियाणा के स्टेट ड्रग अथॉरिटीज ने पिछले हफ्ते मेडेन फार्मा के कुंडली और सोनीपत में स्थित प्लांट्स की जांच की। इस दौरान उन्हें डॉक्यूमेंट्स में अनियमितताओं के साथ दवाओं में इस्तेमाल होने वाली सामग्री में गलत पदार्थों की जांच के लिए सबूतों की कमी जैसे मुद्दे दिखे, जिनका रिपोर्ट में जिक्र किया गया है।
WHO ने अपने बयान में इन दवाओं में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) या एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) जैसे दूषित पदार्थों की उपस्थिति की बात कही थी, जिनका जो कभी-कभी मेडिकल सिरप में सॉल्वेंट के रूप में इस्तेमाल होने वाले प्रोपलीन ग्लाइकोल में मौजूद होते हैं और इनके सेवन से बच्चों की मौत हो सकती हैं।
DEG और EG की मात्रा दवाओं में बहुत कम होती है और अगर इनकी मात्रा थोड़ी भी अधिक होती है तो इनसे किडनी के फेल होने जैसी बीमारी हो सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। कम वजन वाले बच्चों के लिए यह और घातक है।