रेलवे को ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग के जोर पकड़ने का मौका नहीं देना चाहिए, जानिए क्यों

गवर्नमेंट एंप्लॉयीज ने 10 अगस्त को पेंशन की पुरानी स्कीम (Old Pension Scheme) बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में एकजुटता दिखाई। इसे 'पेंशन राइट्स महारैली' नाम दिया गया। इसका आयोजन ज्वाइंट फॉरम फॉर रिस्टोरेशन ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम और नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन की तरफ से किया गया। इसमें रेलवे और एंप्लॉयीज और शिक्षकों ने भी हिस्सा लिया

अपडेटेड Aug 10, 2023 पर 5:01 PM
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रेलवे में करीब 13 लाख एंप्लॉयीज और करीब 15 लाख पेंशनर्स हैं। पिछले कुछ दशकों में रेलवे एंप्लॉयीज की पेंशन पर होने वाला खर्च रेल मंत्रियों के गले का फंदा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में रेलवे का पेंशन फंड बिल 60,000 करोड़ रुपये था।

मनीष आनंद

केंद्र और राज्य सरकारों के एंप्लॉयीज ने 10 अगस्त को पेंशन की पुरानी स्कीम (Old Pension Scheme) बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में एकजुटता दिखाई। इसे 'पेंशन राइट्स महारैली' नाम दिया गया। इसका आयोजन ज्वाइंट फॉरम फॉर रिस्टोरेशन ऑफ ओल्ड पेंशन स्कीम और नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन की तरफ से किया गया। इसमें रेलवे और एंप्लॉयीज और शिक्षकों ने भी हिस्सा लिया। नई पेंशन स्कीम (NPS) 2004 में लागू की गई थी। इस बारे में मुख्य राजनीतिक दलों कांग्रेस और भाजपा में सहमति बनी थी। यह माना गया था कि केंद्र और राज्य सरकारों को ओल्ड पेंशन स्कीम को जल्द खत्म करना चाहिए नहीं तो कुछ सालों में पेंशन के भारी बोझ से सरकारों का दम घुट जाएगा।

NPS का लाभ उठाने वाले एंप्लॉयीज के पहले बैच के 2034 से पहले रिटायर होने की उम्मीद नहीं है। लेकिन, आजकल दिल्ली के रेल भवन जैसी जगहों पर खाली समय में एंप्लॉयीज यह चर्चा करते नजर आते हैं कि रिटायरमेंट पर उन्हें पेंशन के रूप में कितने पैसे मिलेंगे। वे दावा करते हैं कि ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत आने वाले एंप्लॉयीज के मुकाबले उन्हें काफी कम पैसे बतौर पेंशन मिलेंगे। यह सही है कि ओल्ड पेंशन स्कीम अश्योर्ड गारंटी और राज्य सरकारों के खजानों पर आधारित अब भी एंप्लॉयीज के लिए आकर्षक बनी हुई है। इसमें एंप्लॉयीज की अंतिम सैलरी का 50 फीसदी बतौर पेंशन रिटायरमेंट के बाद मिलती है। सरकारी नौकरी में आने की चाहत में इस तथ्य का सबसे बड़ा हाथ है। यह गारंटी NPS में नहीं मिलती है। यह कंट्रिब्यूटरी स्कीम है और पेंशन के लिए तैयार होने वाला फंड एंप्लॉयीज के कंट्रिब्यूशन और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करता है।


लेकिन, रेलवे को इस बारे में सावधानी बरतनी होगी। अगर उसने ओल्ड पेंशन स्कीम की बढ़ती मांग को काबू में करने की कोशिश नहीं की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। कुछ साल पहले तक रेलवे की नौकरी का बहुत आकर्षण था। इसकी वजह रेलवे की तरफ से एंप्लॉयीज को दी जाने वाली सुविधाएं थीं। रेलवे का आकार धीरे-धीरे बढ़ता गया, जिससे इसके रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा सैलरी और पेंशन पर खर्च होने लगा।

रेलवे में करीब 13 लाख एंप्लॉयीज और करीब 15 लाख पेंशनर्स हैं। पिछले कुछ दशकों में रेलवे एंप्लॉयीज की पेंशन पर होने वाला खर्च रेल मंत्रियों के गले का फंदा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में रेलवे का पेंशन फंड बिल 60,000 करोड़ रुपये था। यह संशोधित बजट अनुमान में 2.40 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित आंतरिक रेवेन्यू का करीब 25 फीसदी था। यह आंकड़ा लगातार बढ़ता गया है। फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में पेंशन पर होने वाला रेलवे का खर्च 70,516 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि आंतरिक रेवेन्यू 2.65 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। इस तरह पेंशन बिल रेवेन्यू का करीब 26 फीसदी है।

पेंशन पर रेलवे के इतना ज्यादा खर्च की वजह से सुरक्षा जैसे जरूरी मदों के लिए पर्याप्त पैसे नहीं मिल पाते हैं। यह ध्यान देने वाली बात है कि कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष (RRSk) में जरूरी पैसा डालने में नाकाम रही है। इस कोष में पिछले पांच साल में 1 लाख करोड़ रुपये होना जरूरी था। यह पैसा रेल सुरक्षा से जुड़े कामों पर खर्च होता है।

रेल मंत्रालय ने कैग की रिपोर्ट खारिज कर दी है। उसने अपने डेटा पेश किए हैं। उसने कहा है कि लाइन के नवीनीकरण पर पिछले पांच साल (2017-22) में 58,045 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जो RRSK के दायरे में आता है। उसने यह भी कहा है कि सुरक्षा से जुड़े कामों पर 1.78 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसमें ट्रैक रिन्यूअल, ब्रिज, रेलवे क्रॉसिंग, रोड ओवब्रिज, रोड अंडर ब्रिज, सिग्नलिंग से जुड़े काम शामिल हैं। अगर RRSK के तहत खर्च अमाउंट के रेलवे के दावे को सही मान लिया जाए तो भी यह साफ है कि 98 फीसदी से ज्यादा के ऑपरेटिंग रेशियो की वजह से रेलवे के पास पूंजीगत खर्च के लिए ज्यादा पैसा नहीं बचता है। इस वजह से उसे लोन लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

रेलवे को ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग के जोर नहीं पकड़ने देने के उपाय करने होंगे। इसके लिए उसे एंप्लॉयीज को भरोसे में लेने की जरूरत है। रेलवे एंप्लॉयीज की एनपीएस से जुड़े फंड मैनेजर्स को एंप्लॉयीज को यह समझाने की जरूरत है कि NPS कैसे काम करती है और ज्यादा कंट्रिब्यूशन की मदद से कैसे पेंशन के लिए तैयार फंड को बढ़ाया जा सकता है। यह ध्यान में रखना होगा कि आर्थिक दिक्कतों की वजह से रेलवे सुरक्षा से जुड़े हजारों पदों पर भर्तियां नहीं कर पा रही है। 10 अगस्त की रैली में एंप्लॉयीज यूनियंस ने ओल्ड पेंशन स्कीम के समर्थन में नारे दिए। अब रेलवे को एंप्लॉयीज को एनपीएस के फायदों के बारे में बताने में देरी नहीं करनी चाहिए।

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