Ram Mandir: दिसंबर 1992 का वो इतिहास, जब बाबरी के भीतर प्रकट हुए रामलला, उस रात कॉन्स्टेबल बरकत अली ने ऐसा क्या देखा, आज भी दर्ज है उनका बयान

Ram Mandir Inauguration: बरकत का बयान सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है और अयोध्या कार सेवक पुरम के बाहर उनका पूरा बयान अंकित है, लेकिन इस बयान में क्या सच्चाई है, वो अपने-अपने दावे हैं। 22 और 23 दिसंबर की रात अयोध्या में जो कुछ हुआ वो इतिहास बन गया। बरकत अली का बयान कुछ भी हो, लेकिन एक कहानी उसी रात सरयू तट से शुरू हो रही थी

अपडेटेड Jan 08, 2024 पर 6:33 PM
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Ram Mandir: दिसंबर 1992 का वो इतिहास, जब बाबरी के भीतर प्रकट हुए रामलला, उस रात कॉन्स्टेबल बरकत अली ने ऐसा क्या देखा, आज भी दर्ज है उनका बयान

Ram Mandir Inauguration: 23 दिसंबर की सुबह बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) राम जन्म भूमि (Ram Janmbhoomi) चौकी में तैनात एक कॉन्स्टेबल बरकत अली पिछली रात को हुई घटना पर बयान दर्ज करा रहे थे- "मैं उस समय बाबरी मस्जिद चौकी में ड्यूटी पर था। अकस्मात मैंने देखा की बाबरी मस्जिद के गुंबद के नीचे बहुत बड़ा नीला प्रकाश हुआ और वो प्रकाश फिर सुनहरी रोशनी में बदल गया। इसी रोशनी के बीच मुझे एक दिव्य बालक दिखाई दिया। उस बालक के बाल घुंघराले थे। स्वस्थ बदन था। ऐसा लगा कि रामलला प्रकट हो गए हैं। मेरे सपने के हालात हो गए और तभी मैंने देखा की बाबरी मस्जिद के मुख्य द्वार का ताला जमीन पर टूटा हुआ पड़ा था और भीतर राम लला प्रकट हो गए थे। वहां से आवाजें आ रही थी कि भए प्रगट कृपाला दीन दयाला।"

बरकत का बयान सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है और अयोध्या कार सेवक पुरम के बाहर उनका पूरा बयान अंकित है, लेकिन इस बयान में क्या सच्चाई है, वो अपने-अपने दावे हैं। 22 और 23 दिसंबर की रात अयोध्या में जो कुछ हुआ वो इतिहास बन गया। बरकत अली का बयान कुछ भी हो, लेकिन एक कहानी उसी रात सरयू तट से शुरू हो रही थी।

यहां से शुरू हुई पूरी कहानी


साल 1949 की 22 व 23 दिसंबर की हाड़ कंपा देने वाली रात में अयोध्या का सरयू तट। रात के अंधेरे में सरयू तट पर एक लालटेन जल रही थी। कुछ साधू संत रात 11 बजे सरयू में स्नान कर रहे थे। पास में कुछ दूसरे साधू भी मौजूद थे। जो साधू सरयू में स्नान कर कर रहे थे, उनमें गोरक्ष पीठ के पीठाधीश्वर महंत दिग्विजय नाथ जी, अयोध्या के कांग्रेस विधायक और प्रसिद्ध समाजसेवी बाबा राघव दास, निर्मोही अखाड़े के प्रमुख संत बाबा अभिराम दास, रामचंद दास परमहंस और गीता प्रेस गोरखपुर के संपादक हनुमान प्रसाद पोद्दार शामिल थे।

इन संतो ने फिर राम लला की मूर्ति को स्नान कराया। सभी साधू संत ने रामलला की मूर्ति को एक टोकरी में रखा। फिर उस टोकरी को बाबा अभिराम दास अपने सिर पर रख कर 'सीताराम सीताराम' कहते हुए अयोध्या की गलियों की तरफ आगे बढ़े। रामचंद्र दास परमहंस एक लोटे में सरयू का जल लिए हुए थे।

इसके साथ कुछ साधू संत बाल्टियों में सरयू का जल भर कर साथ में आगे बढ़ रहे थे। लालटेन की रोशनी में संतो की टोली 'सीताराम सीताराम' का जाप करते अयोध्या की गलियों में आगे बढ़ती जा रही थी। साधूओं की यह टोली रात लगभग 12 बजे बाबरी मस्जिद में पहुंची।

वहां पर मस्जिद के मोअज्जन मोहम्मद इस्माइल मौजूद थे। साधूओं की टोली को इतनी रात देखा, तो वह सतर्क हो गए और उनका विरोध किया। तभी बाबा राघव दास ने इस्माइल से कहा कि बेकार की कोशिश मत करो। यह भगवान राम लला की जन्मभूमि है।

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मोहम्मद इस्माइल समझ गए कि उनका प्रयास अब बेकार है और वह वहां से यह कहते हुए भाग खड़े हुए की बाबरी मस्जिद नापाक कर दी गई है। बाबा अभिरामदास ने ड्यूटी पर तैनात कॉन्स्टेबल शेर सिंह से कहा कि ताला खोलो। बाबरी मस्जिद पर लगे ताले को खोल दिया गया। साधूओं की टोली ने सरयू के जल से तीनों गुंबदों के नीचे सफाई की और इस सब कार्रवाई के बीच 'सीताराम सीताराम' का जाप चलता रहा। इसी राम धुन के बीच गुंबद के नीचे राम लला प्रतिष्ठित कर दिए गए और भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी का गायन चलने लगा।

सभी साधू संत एक दूसरे के गले लग गए और कहा कि राम लला प्रकट हो गए हैं। कीर्तन करने वालों ने अपने कीर्तन की आवाज और तेज कर दी। लेकिन अयोध्या अभी भी सो रही थी, मंदिरों में शांति छाई हुई थी। दूसरी ओर बाबरी मस्जिद के नीचे 'सीताराम सीताराम' का जाप चल रहा था।

सुबह लगभग 4 बजे अयोध्या के मंदिरों में हलचल शुरू हुई और मंगला आरती होने लगी। अयोध्या में घंटे घड़ियाल गूंज रहे थे, लेकिन किसी को नहीं पता था कि बीती रात बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि क्षेत्र में हुआ क्या है। सूरज की किरणें बिखरने के पहले ही पूरे अयोध्या फैजाबाद में ये खबर फैल गई कि देर रात 12 बजे राम लला प्रकट हो गए हैं और वो भी बाबरी मस्जिद में। बस फिर क्या था, पूरी अयोध्या घंटा घड़ियाल से गूंजने लगी।

लोगों की टोलिया बाबरी मस्जिद की तरफ बढ़ने लगी। हर तरफ जयकार हो रहा था। भ-ए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी की गूंज हो रही थी। यह खबर सुबह ही लखनऊ मुख्यालय तक पहुंचा दी गई। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। राजधानी लखनऊ से स्थित की जानकारी ली जा रही थी।

ड्यूटी पर बरकत अली या शेर सिंह?

मस्जिद के मुअज्जिन मोहम्मद इस्माइल भागते हुए अपने फैजाबाद स्थित घोसियाना मोहल्ला के अपने घर पहुंचा और उसने मोहल्ले में बताया की बाबरी मस्जिद नापाक कर दी गई है। वहां भगवान राम की मूर्ति स्थापित हो चुकी है, लेकिन अयोध्या दूसरे रंग में रंग गई थी।

फैजाबाद प्रशासन ने इस घटना पर कार्रवाई शुरू की और सबसे पहले चौकी में तैनात बरकत अली का बयान दर्ज हुआ। बरकत अली का कहना था की वह उस समय ड्यूटी पर थे और सुरक्षा का काम देख रहे थे।

उन्होंने अपने सामने राम लला को प्रकट होते देखा है। बरकत अली के बयान ने पूरे प्रशासन को चौंका दिया। अयोध्या के थाने के इंचार्ज ने कहा की बरकत अली उसे समय आराम कर रहे थे। ड्यूटी पर थे ही नहीं। असल में कॉन्स्टेबल शेर सिंह की ड्यूटी 2 घंटे पहले ही खत्म हो गई थी, लेकिन उन्होंने बरकत अली से कहा कि तुम फिलहाल आराम करो मैं ड्यूटी कर ले रहा हूं। शेर सिंह बाबा अभिराम दास से प्रभावित थे।

बरकत अली आराम कर रहे थे, लेकिन बरकत अली ने इसे पूरी तरह से गलत बताया और कहा कि वह उस समय अपनी ड्यूटी पर थे। उन्होंने अपना बयान वापस नहीं लिया और अंत समय तक वह इस बात पर डटे रहे कि वह उस समय ड्यूटी पर थे और उन्होंने राम लला को प्रकट होते देखा है और दिव्य अनुभव किया है।

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