आरबीआई 6 अप्रैल को दरों में कर सकता है 25 बीपीएस की बढ़ोतरी, दिसंबर 2023 तक दरों में कटौती की उम्मीद

एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री, सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि आरबीआई द्वारा दरों में एक और अंतिम 0.25 प्रतिशत की वृद्धि किये जाने की उम्मीद है। इस बढ़ोतरी से अत्यधिक दिख रही मंहगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। भट्टाचार्य ने कहा ​​कि ग्रोथ में मंदी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी को वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही के अंत तक दरों में कटौती करने के लिए प्रेरित कर सकती है

अपडेटेड Mar 30, 2023 पर 9:18 AM
RBI ने अत्यधिक बढ़ी हुई महंगाई का मुकाबला करने के लिए मई 2022 से अब तक दरों में 250 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि की है
     
     
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    भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) अगले सप्ताह मौजूदा दर वृद्धि चक्र में अंतिम 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि का विकल्प चुन सकता है। वित्तीय वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही के अंत तक ही इसमें कमी किये जाने की उम्मीद है। ऐसा एक्सिस बैंक (Axis Bank) के अर्थशास्त्रियों ने कहा है। आरबीआई के अधिकारियों ने कथित तौर पर मंगलवार को अर्थशास्त्रियों से मुलाकात की। जिन्होंने प्रमुख दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की सिफारिश की है। मई 2022 से आरबीआई ने अत्यधिक बढ़ी हुई महंगाई का मुकाबला करने के लिए दरों में 250 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि की है। जबकि महंगाई की दर 6 प्रतिशत की ऊपरी टॉलरेंस लिमिट से ऊपर बनी हुई है।

    इससे कर्ज लेने वालों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कुछ लोग इस वृद्धि के कारण अपने कामकाजी जीवन से परे लोन अवधि को लेकर चिंतित हैं।

    एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री, सौगत भट्टाचार्य (Chief Economist at Axis Bank, Saugata Bhattacharya) ने कहा कि वह दरों में एक और अंतिम 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की की उम्मीद कर रहे हैं। उनका मानना ​​है कि इस बढ़ोतरी से अत्यधिक मंहगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।


    भट्टाचार्य ने ग्रोथ में मंदी का भी उल्लेख किया। उनका मानना ​​​​है कि ये भी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी को वित्त वर्ष 2024 की तीसरी तिमाही के अंत तक दरों में कटौती करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

    भट्टाचार्य ने उल्लेख किया कि आरबीआई के "विड्रावल ऑफ अकोमोडेशन" ("withdrawal of accommodation") के रुख को बदलना जल्दबाजी होगी। हालांकि उनका अनुमान है कि 6 अप्रैल को अगली समीक्षा में उसमें कुछ बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। भट्टाचार्य के अनुसार आरबीआई जून की समीक्षा में रुख को "न्यूट्रल" में बदल देगा।

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    उन्होंने आगे कहा कि विकास की गति को बनाए रखने में अर्थव्यवस्था का लचीलापन उल्लेखनीय है। लेकिन दरों में बढ़ोतरी और अन्य कारकों के कारण कुल डिमांड का प्रभावित होना तय है।

    भट्टाचार्य ने विकास में मंदी के कारणों की पहचान की है। ये हैं वर्किंग कैंपिटल साइकल का लंबा होना। नॉन-बैंक कर्जदाताओं का अपने कर्जदारों पर दर वृद्धि को पारित करने में असमर्थ होना। कम लागत वाली ऑटोमोबाइल बिक्री का हायर कॉम्प्लियांस कॉस्ट के कारण प्रभावित होना। निम्न और मध्यम स्तरीय आवास परियोजनाओं में बिक्री और इंक्वायरी में सुस्ती का दिखना।

    उनके अनुसार बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत में कारोबार स्थापित करने के लिए निवेश बढ़ाने और अपेक्षाकृत अधिक वेतन वाली नौकरियां देने से डिमांड बढ़ने में मदद मिल रही है।

    उनका मानना ​​है कि वित्त वर्ष 24 की तीसरी तिमाही के अंत तक जब विकास मंदी अधिक स्पष्ट हो जाएगी। एक बार जब महंगाई अपनी स्पष्ट प्रवृत्ति प्रदर्शित करने के लिए 5-5.50 प्रतिशत की सीमा तक गिर जाएगी। तब जाकर आरबीआई 25 बेसिस प्वाइंट्स की दर कटौती का विकल्प चुनेगा।

     

     

     

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