पिछले कुछ दिनों पहले ही आपने सड़कों पर देश तीन सबसे शीर्ष पहलवानों (Wrestlers) को धरना प्रदर्शन (Protest) करते हुए देखा होगा। अभी वो तस्वीर दिमाग से पूरी तरह उतरी भी नहीं होगी कि उससे पहले ही भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की टॉप कमेटी ने विरोध करने वाले तीन में से दो पहलवानों को छूट देते हुए, आगामी एशियाई खेलों (Asian Games 2023) में सीधे एंट्री देकर फिर से हलचल पैदा कर दी है। एशियन गेम्स 2023 19 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चीन के हांगझू में होंगे।
बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट को उनकी अपनी वेट कैटेगरी में डायरेक्ट एंट्री दे दी गई है। हालांकि, WFI एड हॉक कमेटी ने घोषणा की है कि उन कैटेगरी के लिए सिलेक्शन ट्रायल अभी भी लिए जाएंगे और ट्रायल के विजेताओं को स्टैंडबाय पर रखा जाएगा।
इस फैसले पर पहले से ही काफी सवाल उठ रहे हैं। साथ ही इसे ऐसे भी देखा जा रहा है कि हो सकता है भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) से लेकर खेल मंत्रालय तक पूरी खेल मशीनरी ने नाराज पहलवानों और प्रदर्शन को शांत करने के लिए ऐसा किया हो।
ये भी कहा जा रहा है कि ये फैसला दूसरे खिलाड़ियों के लिए गलत है। साथ ही इसके पीछे एक प्रमुख कारण ये भी हो सकता है कि WFI के पूर्व प्रमुख बृज भूषण सिंह पर इन खिलाड़ियों ने आरोप लगाया था कि उन्हें ट्रायल में शामिल होने से इनकार किया गया था, जिसका वे विरोध कर रहे थे।
News18 ने एड हॉक समिति के विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि ये निर्णय न केवल पैनल के कोच, बल्कि कुश्ती महासंघ से भी परामर्श के बाद और फेडरेशन के सिलेक्शन की नीतियों के मापदंडों के भीतर ही लिया गया था।
सूत्रों ने ये भी बताया कि सभी कोच ने ऐसा कहा है कि अब भी पुनिया और फोगाट दोनों ही अपनी-अपनी कैटेगरी में बेस्ट हैं और डायरेक्ट एंट्री के जरिए उनके सिलेक्शन को कोई विरोध नहीं करेगा।
जब इन खिलाड़ियों की तैयारी और फिटनेस के बारे में पूछा गया, तो इन सूत्रों ने कहा कि ज्यादातर कोच को ऐसा लगता है कि दोनों खिलाड़ियों का अनुभव इस लेवल का है कि वे तीन हफ्तों में अपने आप को अच्छे से तैयार कर सकते हैं।
इस निर्णय से प्रभावित खिलाड़ियों में से एक, अंतिम पंघाल ने यह मुद्दा उठाया है कि कैसे चुने गए पहलवान काफी समय से प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती भी दी है।
क्या कहते हैं सिलेक्शन ट्रायल के लिए WFI के नियम?
एशियाई खेलों के लिए सिलेक्शन ट्रायल के लिए WFI के नियम कहते हैं कि भले ही सभी वेट कैटेगरी में ट्रायल अनिवार्य हैं, लेकिन सिलेक्शन कमेटी, मेन कोच/विदेशी विशेषज्ञ की सिफारिश के बिना ट्रायल के ओलंपिक/विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेताओं जैसे प्रतिष्ठित खिलाड़ियों का सिलेक्शन कर सकती है।
जहां पुनिया 2020 ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडल विजेता हैं, तो वहीं फोगाट ने 2022 में विश्व चैंपियनशिप में अपना दूसरा पदक जीता।
दूसरा सवाल ये उठाया गया कि ओलंपिक सिल्वर मेडल विजेता रवि दहिया को दूसरे लोगों की तरह डायरेक्ट एंट्री क्यों नहीं मिली। उनके मामले में ये बताया गया कि कुछ चोट से जुड़े कारणों के चलते उन्हें ये छूट नहीं दी गई।
इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने एशियाई खेलों के ट्रायल से पुनिया और फोगट को छूट देने के लिए WFI से जवाब मांगा है।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए लिस्टेड करते हुए कहा, "अगर सिलेक्शन का आधार सही और नियमों के अनुसार है, तो ये मैटर यहीं खत्म हो जाता है।" इस मामले पर अगली सुनवाई शुक्रवार 21 जुलाई को होगी।