Nikhat Zareen: पहले कंधे की चोट, फिर मैरी कॉम से विवाद, आसान नहीं रहा निजामाबाद की बॉक्सर का विश्व चैंपियन बनने का सफर

Nikhat Zareen: 25 साल की निकहत के लिए ये कोई आसान सफर नहीं था। इस सफर में उन्हें अपने शुरुआती सालों में चोट और अपनी ही आइडल मैरी कॉम से मैदान पर और बाहर संघर्ष करना पड़ा था

अपडेटेड May 21, 2022 पर 1:34 PM
आसान नहीं रहा निकहत जरीन का विश्व चैंपियन बनने का सफर

भारतीय मुक्केबाज (Indian Boxer) निकहत जरीन (Nikhat Zareen) उम्मीदों पर खरी उतरी हैं। निकहत गुरुवार को इस्तांबुल में महिला विश्व चैंपियनशिप (Women's World Championship) के फ्लाइवेट (52KG) वर्ग के एकतरफा फाइनल में विश्व चैंपियन (World Champion) बनीं। निकहत ने थाईलैंड की जिटपोंग जुटामस को 5-0 से हराकर ये खिताब हासिल किया। भारत का चार साल में इस प्रतियोगिता में यह पहला गोल्ड मेडल (Gold Medal) है। पिछला स्वर्ण पदक मैरी कॉम (Mary Kom) ने 2018 में जीता था।

2019 में दिग्गज एमसी मैरी कॉम ने पूछा था कि 'निकहत जरीन कौन हैं'? आज वही निकहत जरीन विश्व चैंपियन बन गई हैं। तीन साल पहले, निकहत टोक्यो ओलंपिक से पहले मैरी कॉम के खिलाफ "निष्पक्ष ट्रायल" की गुहार लगा रही थीं।

जैसे ही गुरुवार को फ्लाईवेट वर्ल्ड चैंपियन के नाम की घोषणा हुई, जरीन खुशी से उछल पड़ीं और हवा में झूम उठीं। उन्होंने आखिरकार ये कर दिखाया। उन्होंने आखिरकार खुद को साबित कर दिया और अपने सभी विरोधियों का मुंह बंद कर दिया।


उनकी इस शानदार जीत के बाद निकहत को लोग अब महान एमसी मैरी कॉम की संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देख रहे हैं। मगर 25 साल की निकहत के लिए ये कोई आसान सफर नहीं था। इस सफर में उन्हें अपने शुरुआती सालों में चोट और अपनी ही आइडल मैरी कॉम से मैदान पर और बाहर संघर्ष करना पड़ा था।

जूनियर विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने के बाद झटका

एक दशक पहले जूनियर विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने के बाद, जरीन को एक बड़ा झटका लगा था। दरअसल एक बाउट के दौरान उनका कंधा टूट गया था, जिससे वह लगभग एक साल तक रिंग से बाहर रहीं।

फिर भी बॉक्सर खुद को साबित करने के लिए दृढ़ थीं और उन्होंने शानदार वापसी की। जरीन ने सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और 2018 में बेलग्रेड इंटरनेशनल चैंपियनशिप भी जीतीं।

अगले साल में निजामाबाद की इस मुक्केबाज के लिए कई उतार-चढ़ाव आने वाले थे। उन्होंने प्रतिष्ठित स्ट्रैंड्जा मेमोरियल, यूरोप की सबसे पुरानी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण जीता। फिर थाईलैंड ओपन में एक सिल्वर जीतकर अपनी पहचान बनाई, लेकिन इंडिया ओपन में मैरी कॉम से बेहतर साबित नहीं हो सकीं।

अपनी ही आइडल मैरी कॉम से विवाद

विश्व चैंपियनशिप से पहले, उन्हें बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) ने ट्रायल से मना कर दिया था और चुनाव करते समय मैरी कॉम के लगातार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें भेजने का फैसला किया गया।

जब महासंघ ने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य जीतने के कारण मैरी कॉम को ओलंपिक क्वालीफायर के लिए भेजने का फैसला किया, तो जरीन ने तत्कालीन खेल मंत्री किरेन रिजिजू को पत्र लिखकर "उचित मौका" मिलने की मांग की।

तब गुस्से में मैरी कॉम ने पूछा था 'कौन है निकहत जरीन'? निकहत ने कहा, "मैं मैरी कॉम से तब से प्रेरित हूं, जब मैं छोटी थी। इस प्रेरणा के साथ न्याय करने का सबसे अच्छा तरीका था कि मैं उनकी तरह एक महान मुक्केबाज बनने की कोशिश करूं। मैरी कॉम खेल में इतनी बड़ी हस्ती हैं कि उन्हें प्रतियोगिता से छिपने की जरूरत नहीं है और वास्तव में अपनी ओलंपिक योग्यता का बचाव नहीं करना चाहिए।"

ज़रीन के अनुरोध पर ध्यान दिया गया और मैरी कॉम की नाराजगी के लिए एक ट्रायल की घोषणा की गई। उन्होंने दावा किया कि वह हमेशा ट्रायल के लिए तैयार थीं और वही कर रही थीं, जो BFI ने कहा था। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि युवा खिलाड़ी ने हर जगह उनका नाम घसीटा।

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हालांकि ये मुकाबला एकतरफा साबित हुआ, क्योंकि जरीन मैरी कॉम से 1-9 से हार गईं। दोनों खिलाड़ियों के बीच बात इस कदर बिगड़ चुकी थी कि फाइनल के बाद दोनों न ही हाथ मिलाया और न जरीन का उत्साह बढ़ाया गया। इसे देख वे भावुक हो गईं।

लेकिन यह अप्रिय घटना जरीन को वाहवाही लूटने से नहीं रोक पाई। जरीन प्रभावशाली प्रदर्शनों के दम पर स्ट्रैंड्जा मेमोरियल में दो गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय मुक्केबाज बन गईं।

उन्होंने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा, जिससे भारत को विश्व चैंपियनशिप में चार साल में पहला स्वर्ण मिला। वह अपने सभी विरोधियों पर हावी रहीं।

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