'मैं फांसी पर लटकने के लिए तैयार हूं, अगर...' महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों पर WFI के चेयरमैन बृजभूषण सिंह ने दी सफाई
WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan Sharan Singh) ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जोरदार खंडन करते हुए पहलवान के बयानों पर पलटवार किया है। सिंह ने कहा, "यौन उत्पीड़न एक बड़ा आरोप है"
महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों पर WFI के चेयरमैन बृजभूषण सिंह ने दी सफाई
विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) ने एक चौंकाने वाले खुलासे में बुधवार को रोते हुए आरोप लगाया कि रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brijbhushan Sharan Singh) कई सालों से महिला पहलवानों का यौन शोषण (sexual harassment) कर रहे हैं। हालांकि, WFI की चीफ और भारतीय जनता पार्टी के सांसद ने इन आरोपों को खारिज किया। विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता और ओलंपियन विनेश ने ये भी दावा किया कि लखनऊ में नेशनल कैंप में कई कोच ने भी महिला पहलवानों का शोषण किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कैंप में कुछ महिलाएं हैं, जो WFI अध्यक्ष के कहने पर पहलवानों से संपर्क करती हैं।
WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जोरदार खंडन करते हुए पहलवान के बयानों पर पलटवार किया है। सिंह ने कहा, "यौन उत्पीड़न एक बड़ा आरोप है।"
उन्होंने कहा, "जब मेरा ही नाम इसमें घसीटा गया है, तो मैं कैसे कार्रवाई कर सकता हूं?" सिंह ने घोषणा की, "मेरे खिलाफ पहलवानों के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है, और अगर एक भी यौन उत्पीड़न का मामला साबित हो जाता है, तो भी मैं फांसी पर लटकने के लिए तैयार हूं।"
28 साल की पहलवान ने हालांकि, साफ किया कि उन्होंने खुद इस तरह के शोषण का सामना नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें WFI अध्यक्ष के इशारे पर उनके करीबी अधिकारियों से जान से मारने की धमकी मिली थी, क्योंकि उन्होंने टोक्यो ओलंपिक खेलों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान उनका ध्यान इन मुद्दों पर आकर्षित करने का हिम्मत दिखाई थी।
'मुझे WFI अध्यक्ष के करीबियों से मिली जान से मारने की धमकी'
दिल्ली के जंतर मंतर पर चार घंटे से ज्यादा समय तक धरने पर बैठने के बाद विनेश ने कहा, "मैं कम से कम 10-12 महिला पहलवानों को जानती हूं, जिन्होंने मुझे WFI अध्यक्ष से हुए यौन शोषण के बारे में बताया है। उन्होंने मुझे अपनी आपबीती सुनाईं। मैं अभी उनका नाम नहीं ले सकती, लेकिन अगर हम देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से मिले, तो मैं नामों का खुलासा जरूर कर सकती हूं।"
उन्होंने कहा, "मुझे उन लोगों से जान से मारने की धमकी मिली है, जो WFI अध्यक्ष के करीबी हैं। अगर यहां बैठे हममें से किसी को कुछ होता है, तो केवल WFI अध्यक्ष ही जिम्मेदार होंगे।"
देश के प्रमुख पहलवानों की मांग पर बृजभूषण सिंह ने कहा, "मैं WFI अध्यक्ष का पद नहीं छोड़ूंगा, लेकिन मैं CBI या पुलिस की जांच के लिए तैयार हूं।" सिंह ने फोगट से मौत की धमकी मिलने के बाद कानून प्रवर्तन से संपर्क नहीं करने के बारे में सवाल किया।
मेरे खिलाफ इस साजिश के पीछे एक उद्योगपति- WFI अध्यक्ष
सिंह ने कहा, "अगर विनेश को जान से मारने की धमकी मिली, तो उसने पुलिस से संपर्क क्यों नहीं किया?" सिंह आगे ने कहा कि "मेरे खिलाफ इस साजिश के पीछे एक उद्योगपति का हाथ है।"
वहीं विनेश के साथ बैठे टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता बजरंग पूनिया ने सिंह को ‘तानाशाह’ करार देते हुए कहा कि महासंघ मनमाने ढंग से चलाया जा रहा है और जब तक WFI अध्यक्ष को हटाया नहीं जाता, तब तक वे किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेंगे।
इन दोनों के अलावा रियो ओलंपिक मेडल विजेता साक्षी मलिक, विश्व चैम्पियनशिप मेडल विजेता सरिता मोर, संगीता फोगाट, सत्यव्रत मलिक, जितेंद्र किन्हा और राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेता सुमित मलिक जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे 30 पहलवानों में शामिल हैं।
बजरंग ने PTI से कहा, "हमारी लड़ाई सरकार या भारतीय खेल प्राधिकरण के खिलाफ नहीं है। हम WFI के खिलाफ हैं। हम आज इसका ब्यौरा देंगे। ये तो अब आर पार की लड़ाई है।"
उन्होंने कहा, "WFI अध्यक्ष को हटाए जाने तक हम किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेंगे। यह भारतीय कुश्ती को बचाने की लड़ाई है। हमें विदेशी कोचों की मदद और समर्थन से दूर किया जा रहा है, जबकि अध्यक्ष ने गोंडा में अपनी एकेडमी के लिए एक विदेशी कोच को काम पर रखा है।" बजरंग का सहयोगी स्टाफ भी धरने पर बैठा था, जिसमें उनके कोच सुजीत मान और फिजियो आनंद दुबे शामिल हैं।
बृजभूषण ने आगे कहा, "ये वही पहलवान है, जो एक हफ्ते पहले मुझसे मिले थे और तब कुछ भी ऐसा नहीं कहा था।" WFI प्रमुख ने संकेत दिया कि नई नीति और उनकी तरफ से पेश किए गए नियमों से शायद पहलवानों को थोड़ी परेशानी हो रही है और इसलिए विरोध किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पहलवानों को राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लेने और निष्पक्ष सिलेक्शन के लिए ट्रायल में शामिल होने के लिए कहा जा रहा है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा, "अलग-अलग राज्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी करते हैं और सभी चाहते हैं कि देश के सर्वश्रेष्ठ एथलीट प्रतिस्पर्धा करें। इनमें से किसी भी पहलवान ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया है। हमने ये स्पष्ट कर दिया है कि नेशनल चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने और जीतने वाले एथलीटों को ही नेशनल कैंप के लिए चुना जाएगा।"
उन्होंने कहा, "इस खेल में हरियाणा देश का गौरव रहा है, लेकिन हम कुश्ती को दूसरे राज्यों में भी ले जाना चाहते हैं। इसलिए हमने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कई टीमों को भेजने वाले राज्यों की व्यवस्था बंद कर दी।"
सिंह ने कहा, "बिहार, झारखंड, मणिपुर, नागालैंड और मिजोरम जैसे राज्य कमजोर हैं और हमें वहां खेल को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसलिए हमने राष्ट्रीय स्तर की नियमित चैम्पियनशिप के अलावा ‘नेशनल ओपन’ चैंपियनशिप की शुरुआत की और वहां भी हरियाणा ने 61 प्रतिशत पदक जीते।"