इंडिया में महंगाई (Inflation) 8 साल के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई है। पिछले हफ्ते रिटेल इनफ्लेशन के आंकड़े आए। अप्रैल में रिटेल इनफ्लेशन 7.79 फीसदी पहुंच गया। मार्च में यह 6.95 फीसदी था। इससे साफ है कि महंगाई तेजी से बढ़ रही है। खासकर यूक्रेन क्राइसिस शुरू होने के बाद फ्यूल, गेहूं, खाद्य तेल सहित कई चीजों के प्राइसेज बढ़े हैं। इसका असर रिटेल इनफ्लेशन पर पड़ा है।
पिछले हफ्ते जारी रिटेल इनफ्लेशन के आंकड़ों से पता चला है कि पूरे देश में चीजों की कीमतें बढ़ने का ट्रेंड एक जैसा नहीं है। कुछ राज्यों में महंगाई ज्यादा बढ़ी है तो कुछ में कम। पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, हरियाणा और तेलंगाना में महंगाई ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं। इन राज्यों में रिटेल इनफ्लेशन 9 फीसदी पहुंच गया है।
कंज्यूमर इनफ्लेशन (CPI) डेटा के मुताबिक, देश के कुल 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 26 में अप्रैल में इनफ्लेशन 6 फीसदी से ज्यादा रहा। सबसे ज्यादा 9.12 फीसदी महंगाई पश्चिम बंगाल में रही। मध्य प्रदेश में यह 9.10 फीसदी थी। तेलंगाना में 9.02 फीसदी थी। उधर, मणिपुर में महंगाई अप्रैल में सिर्फ 2.29 फीसदी बढ़ी। गोवा में यह 4.01 फीसदी रही।
सात राज्यो में महंगाई 8 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। यह 7.79 फीसदी की औसत महंगाई से ज्यादा है। इसकी वजह इन राज्यों में जरूरी चीजों की सप्लाई में दिक्कत है। उधर, दक्षिण के दो राज्यों में रिटेल महंगाई देश के बाकी हिस्सों से काफी कम है। ये दो राज्य हैं-केरल और तमिलनाडु। अप्रैल में इन राज्यों में रिटेल इनफ्लेशन 5 फीसदी से थोड़ा ज्यादा रहा।
अप्रैल में जारी महंगाई के रिटेल डेटा से यह भी पता चला है कि शहरों के मुकाबले गांवों में महंगाई ने ज्यादा पैर पसारा है। शहरी इलाकों में महंगाई जहां 7.1 फीसदी बढ़ी है वही गांवों में यह 8.4 फीसदी बढ़ी है। जानकारों का कहना है कि इस वजह से अलग-अलग राज्यों में रिटेल इनफ्लेशन के आंकड़ों में फर्क हो सकता है। जिन राज्यों में ग्रामीण इलाके ज्यादा है, वहां रिटेल इनफ्लेशन के आंकड़े ज्यादा दिख सकते हैं।
इससे पहले देश में सबसे ज्यादा रिटेल इनफ्लेशन मई 2014 में था। तब रिटेल इनफ्लेशन 8.33 फीसदी पहुंच गया था। खास बात यह है कि महंगाई सिर्फ इंडिया में नहीं बढ़ रही है। अमेरिका सहित दुनियाभर में इनफ्लेशन में उछाल है। इसकी बड़ी वजह इकोनॉमिक रिकवरी है। कोरोना से बेहाल अर्थव्यवस्था अब पटरी पर लौट रही है। इस वजह से चीजों और सेवाओं की मांग में उछाल है। इधर, फरवरी में यूक्रेन क्राइसिस ने महंगाई की आग में घी का काम किया है। इस क्राइसिस की वजह से गेहूं, क्रूड, खाद्य तेल सहित कई चीजों की सप्लाई घटी है। इसका असर इनफ्लेशन पर पड़ा है।