'नॉनवेज पर पूरे देश में लगे बैन', गोमांस पर चल रही डिबेट में शत्रुघ्न सिन्हा ने कर दी ये बड़ी मांग

Shatrughan Sinha : अपने बयानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसकी चर्चा पूरे देश में होने लगी है। संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने नगारिक समान नागरिक संहिता (UCC) की तारीफ की, साथ ही पूरे देश में नॉन वेज खाने को लेकर बड़ी मांग कर दी है

अपडेटेड Feb 05, 2025 पर 2:06 PM
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शत्रुघ्न सिन्हा ने नॉन-वेज खाने पर कह दी बड़ी बात

Shatrughan Sinha : बॉलीवुड के वेटरन एक्टर और तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने नॉन वेज को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद पूरे देश में उसकी चर्चा होने लगी है। TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने पूरे देश भर से नॉन वेज खानों पर बैन लगाने की मांग की। इतना ही नहीं ममता बनर्जी के सांसद ने समान नागरिक संहिता (UCC) की भी सराहन की है। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि देशभर में नॉनवेज भोजन पर प्रतिबंध लगाने की जरूरत है, केवल गोमांस ही नहीं बल्कि सामान्य रूप से सभी प्रकार के नॉनवेज भोजन पर देशभर में प्रतिबंध लगाना चाहिए।

नॉन वेज पर TMC  सांसद का बड़ा बयान

तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने की सहराना की। साथ ही नॉन वेज खाने पर बैन का हवाला देते हुए उन्होंने ने कहा कि, वह इस तरह के कदम का समर्थन करते हैं लेकिन देश के कुछ हिस्सों में इसे लागू करना मुश्किल होगा। संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए टीएमसी सांसद ने कहा कि, "एक दो जगहों के छोड़ कर पूरे देश में गोमांस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मुझे लगता है कि न केवल गोमांस, बल्कि सामान्य रूप से नॉन वेज खाने पर भी देश में प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। हालांकि, पूर्वोत्तर सहित कुछ जगहों पर अभी भी गोमांस लोग खाते हैं और उन्हें कानूनी रुप से भी इसका अधिकार मिला हुआ है।"


UCC की तारीफ में कही ये बात

संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि, "उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करना अच्छा कदम है। उन्होंने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता लागू होना चाहिए और मुझे यकीन है कि हर कोई मेरी बात से सहमत होगा, लेकिन इसमें काफी बारीकियां और खामियां है। प्रॉब्लम ये है कि जो नियम उत्तर भारत में लागू किए जा सकते हैं, उन्हें पूर्वोत्तर राज्यों में लागू नहीं किया जा सकता। UCC के प्रावधानों का मसौदा तैयार करने से पहले एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जानी चाहिए।" बता दें कि उत्तराखंड में 27 जनवरी से UCC को लागू किया गया है।

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