दिग्गज फिनटेक कंपनी भारतपे (Bharatpe) के को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर (Ashneer Grover) के मुताबिक मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग और जीरोधा के को-फाउंडर नितिन कामत बहुत काबिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपवाद होते हैं। अश्नीर ग्रोवर ने ये भी कहा कि जकरबर्ग और कामत ने स्कूल छोड़ने के बाद बहुत सफल कंपनियों की शुरुआत की जो हुत बड़ी बात है।
अश्नीर ग्रोवर के मुताबिक उनके अंदर खुद को खुद से शिक्षित करने की जो तीव्र इच्छा थी, उसके हिसाब से अगर वे औपचारिक तौर पर एजुकेशन सिस्टम में होते तो समय बर्बाद होता। ग्रोवर ने ये बातें एक सवाल के जवाब में कही जिसमें उनसे ऐसे आंत्रप्रेन्योर के बारे में पूछा गया था जो सफल बिजनेस कैरियर शुरू करने के लिए स्कूल छोड़ दिया था।
जकरबर्ग और कामत ने छोड़ी थी पढ़ाई
जीरोधा के निखिल कामत ने 17 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड़ दिया था और एक कॉल सेंटर में नौकरी करने लगे। इसके बाद उन्होंने स्टॉक्स की ट्रेडिंग शुरू की। वहीं मेटा (पूर्व नाम फेसबुक) के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक को डेवलप करने के लिए हार्वर्ड की पढ़ाई छोड़ दी थी। ग्रोवर के मुताबिक जुकरबर्ग और कामथ ने यह समझ लिया था कि वे अपने आप को स्कूली पढ़ाई की बजाय खुद से ज्यादा अच्छे से शिक्षित कर सकते थे और अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं।
कामत और जुकरबर्ग जैसे लोग जन्मजात प्रतिभाशाली
ग्रोवर ऐसे आंत्रप्रेन्योर के विषय पर बात कर रहे थे जिनके पास उस स्तर का कांफिडेंस नहीं है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ सकें। ग्रोवर ने कहा कि उनके जैसे लोगों जिनके पास अधिक क्षमता नहीं है लेकिन प्रेरणा है, वे पहली अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं और फिर एक कदम आगे बढ़ाते हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग जन्मजात प्रतिभाशाली होते हैं और निखिल और नितिन कामथ ऐसे ही अपवाद लोगों में हैं। ग्रोवर ने कहा कि अगर कोई 1250 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाता है तो वह इसकी परवाह नहीं करते है कि उसने पढ़ाई की है या नहीं।
अपनी कैरियर से तुलना की ग्रोवर ने
शार्क टैंक इंडिया के जज ने अपनी एंटरप्रेन्योरियल जर्नी के बारे में बताया कि उनका लक्ष्य जिंदगी में एक स्टैंडर्ड लाइफ हासिल करने का था। ग्रोवर मिडिल क्लास फैमिली से थे और उनका सपना एक बड़ा घर, एक कार और आरामदायक जिंदगी थी। हालांकि यह सब हासिल करने के बाद नौकरी में दम घुटने लगा। ग्रोवर के मुताबिक उन्होंने नौ साल तक बैंकों में काम किया और यह उनकी सबसे बड़ी गलती रही। हालांकि अनुभव से उन्हें समझ आ गया कि वे बिजनेस करने के लिए बने हैं। ग्रोवर के मुताबिक उन्हें नौ साल लगे एंटरप्रेन्योर के लिए तैयार होने में और जो कॉलेज छोड़कर अपना खुद का बिजनेस शुरू करते हैं, उन्हें हैट्स ऑफ।