LIC IPO : कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी (Sebi) ने सरकार के स्वामित्व वाली लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के आईपीओ (IPO) को मंजूरी दे दी है। सीएनबीसी टीवी18 को सूत्रों से यह जानकारी मिली है। सेबी ने ड्राफ्ट दाखिल करने के महज 22 दिनों के भीतर IPO को मंजूरी दे दी है।
सेबी को सौंपे गए ड्राफ्ट पेपर (DRHP) के मुताबिक, सरकार IPO के जरिए LIC के 31 करोड़ इक्विटी शेयर बेचेगी। LIC IPO के इश्यू का 10 फीसदी तक हिस्सा पॉलिसीहोल्डर्स के लिए रिजर्व होगा। कुल 50 फीसदी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व होगा, जबकि नॉन इंस्टीट्यूशन बायर्स के लिए 15 प्रतिशत शेयर रिजर्व होंगे।
5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार
सरकार LIC में 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 63,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद कर रही है, जिससे चालू वित्त वर्ष में उसे 78,000 करोड़ रुपये का डिसइनवेस्टमेंट टारगेट (disinvestment target) हासिल करने में मदद मिलेगी।
यह IPO सरकार की तरफ से पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है और LIC द्वारा कोई नया शेयर जारी नहीं किया जाएगा। सरकार की एलआईसी में 100 फीसदी हिस्सेदारी है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है।
LIC का पब्लिक इश्यू भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा IPO होगा। लिस्टिंग के बाद LIC भारतीय शेयर बाजार की टॉप 3 कंपनियों में शामिल होगी। अन्य दो कंपनियां RIL और TCS हैं।
अभी तक 2021 में आया पेटीएम (Paytm) का IPO सबसे बड़ा इश्यू है, जिसके जरिए बाजार से 18,300 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। इसके बाद कोल इंडिया आती है, जिसने 2010 में लगभग 15,500 करोड़ रुपये जुटाए थे और रिलायंस पावर (2008) 11,700 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।।
12 महीने के लिए वैध है मंजूरी
एक्चुरियल फर्म (Actuarial firm) मिल्लीमैन एडवाइजर्स एलएलपी इंडिया ने LIC की एमबेडेड वैल्यू पर काम किया है, जबकि Deloitte और SBI Caps को pre-IPO ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया है।
आईपीओ की मंजूरी 12 महीने के लिए वैध है। एडेलवीस ने हाल के एक नोट में कहा कि LIC की न्यू बिजनेस प्रीमियम में बाजार हिस्सेदारी 66 फीसदी है, जो दूसरे नंबर की कंपनी से तीन गुनी है।