Private Equity and Venture Capital Funds : प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फंड्स का निवेश नवंबर में सालाना आधार पर 42 फीसदी घटकर 4 अरब डॉलर रह गया। हालांकि, अक्टूबर की तुलना में निवेश में 18 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है। इंडस्ट्री लॉबी आईवीसीए और कंसल्टैंसी ईवाई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह लगातार दूसरी बार मंथली इनवेस्टमेंट में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईवाई के पार्टनर विवेक सोनी ने कहा, दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) और तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के दौरान बिड और मांगी गई कीमत में खासा अंतर होने के कारण डील क्लोजर एक्टिविटी में सुस्ती देखने को मिल रही है। इसके चलते बड़ी डील्स में देरी हो रही है और कंपनियां कम हिस्सेदारी बेचकर छोटे राउंड में पूंजी जुटा रही हैं।
नवंबर में कितने बढ़े ट्रांजेक्शन
डील्स की संख्या की बात करें तो नवंबर में 88 ट्रांजेक्शन हुए, जो एक साल पहले के समान महीने से 15 फी कम रहे और अक्टूबर की तुलना में 13 फीसदी ज्यादा रहे। डील टाइप के लिहाज से देखें तो नवंबर 2022 में सबसे ज्यादा 1.8 अरब डॉलर की चार डील हुईं, जबकि नवंबर, 2021 में पांच डील्स में 1.5 अरब डॉलर का निवेश हुआ। सेक्टर की बात करें तो नवंबर 2022 में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर टॉप पर रहा, जिसे क्लीन एनर्जी में छह डील्स के जरिये 1.6 अरब डॉलर के पीई/वीसी इनवेस्टमेंट से खासा सपोर्ट मिला।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिल रहा अच्छा सपोर्ट
सोनी ने कहा कि फॉर्च्यून 500 कंपनियां (Fortune 500 companies) की मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को खासा सपोर्ट मिला। वहीं बड़ी ग्लोबल एसेट मैनेजर भारत पर दांव लगा रही हैं, क्योंकि उन्होंने अपना इमर्जिंग मार्केट्स के लिए अलोकेशन में संशोधन किया है। यह भविष्य में इनवेस्टमेंट एक्टिविटी के लिए अच्छा संकेत है।
उन्होंने कहा, वैश्विक मंदी की चिंताओं के बीच, चीन कोविड से जुड़ी नीतियों में बदलाव कर रहा है और जिओ पॉलिटिकल माहौल तीन प्रमुख जोखिमों में शामिल है।