यूक्रेन पर रूस (Russian Attacks on Ukraine) ने 24 फरवरी को हमले शुरू किए थे। एक महीना बाद भी रूस का हमला जारी है। यूक्रेन को बर्बादी से बचाने के कूटनीतिक प्रयास विफल रहे हैं। रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच सीधी बातचीत के नतीजें भी बहुत अच्छे नहीं रहे हैं। इस बीच, इंडिया ने अपना स्टैंड न्यूट्रल बनाए रखा है। इसके लिए कुछ देशों ने इंडिया की आलोचना भी की हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडिया ने बहुत सोचसमझ कर यह फैसला लिया है।
पिछले कुछ सालों से इंडिया-चीन के रिश्तें ठीक नहीं हैं
पिछले कुछ सालों से चीन से इंडिया के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच पिछले कुछ सालों में कई बार झड़प हो चुकी है। सीमाई विवाद हल करने की कोशिशें बहुत ज्यादा सफल नहीं रही हैं। हालांकि, बातचीत का सिलसिला टूटा नहीं है। इंडिया ने चीन को बता दिया है कि वह उसके साथ आंख में आंख डालकर बातचीत के लिए तैयार है।
चीन अकेला देश जिसने रूस का साथ दिया है
उधर, जिस तरह से यूक्रेन हमले में रूस को चीन का साथ मिला है, उसने कई सवालों को जन्म दिया है। यूक्रेन पर हमले के ठीक पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन गए थे। वहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी व्यापक बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं का संयुक्त बयान जारी किया गया था। माना जा रहा है कि पुतिन ने जिनपिंग को यूक्रेन को लेकर अपने प्लान की जानकारी दी होगी। चीन ने यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर अपनी आंखें बंद रखी है। पुतिन को जिनपिंग से यही उम्मीद रही होगी।
मुश्किल वक्त पर इंडिया की मदद कर चुका है चीन
सवाल है कि क्या चीन के साथ इंडिया के रिश्ते बिगड़ते हैं तो क्या रूस इंडिया का साथ देगा? दरअसल, रूस इंडिया का ऐसा दोस्त है, जिसने कई बार मुश्किल वक्त पर इंडिया की हेल्प की है। पूर्वी पाकिस्तान में 1971 के युद्ध में रूस की नौसेना ने अमेरिका के सातवें बेड़े टास्कफोर्स 74 को बंगाल की खाड़ी में आगे बढ़ने से रोक दिया था। इस लड़ाई में इंडिया का निर्णायक जीत हुई थी। रूस इंडिया को सबसे ज्यादा डिफेंस इक्विपमेंट की सप्लाई करता है।
इन वजहों से इंडिया का साथ देगा रूस
मशहूर आर्थिक पत्रकार टी के अरुण ने इकोनॉमिक टाइम्स में एक लेख लिखा है। इसमें उन्होंने बताया है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वैश्विक राजनीतिक समीकरण में आए बदलाव के बावजूद इंडिया और चीन में कनफ्लिक्ट की स्थिति में रूस इंडिया का साथ देगा। उन्होंने लिखा है कि रूस अपने पुराने दोस्त इंडिया का सपोर्ट करता रहेगा। इसकी वजह भावनात्मक या पुराने रिश्ते नहीं हैं बल्कि यह है कि ऐसा करना रूस के अपने हित में है।
वैश्विक शक्ति संतुलन के लिहाज से रूस के लिए इंडिया बहुत अहम है। अभी दुनिया में जिन दो बड़ी ताकतों के बीच सबसे ज्यादा प्रतिद्वंदिता है, वे हैं अमेरिकी और चीन। रूस इंडिया को उसी नजर से देखता है, जिस तरह से पश्चिमी देश इंडिया को देखते हैं। इसका मतलब एशिया में चीन को काबू में बनाए रखने से है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका इंडिया की है। एक तरह से रूस और पश्चिमी देश दोनो के सामने चीन की बढ़ती ताकत पर अंकुश लगाने के लिए इंडिया को सपोर्ट करने के सिवाय दूसरा विकल्प नहीं है।