Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तराखंड (Uttarakhand) के उत्तराकाशी (Uttarkashi) में सिल्कयारा सुरंग (Silkyara Tunnel) में फंसे मजदूर (Trapped Workers) बचावकर्मियों से अब बस कुछ ही मीटर दूर हैं। अब महज पांच मीटर की खुदाई ही बाकी है। इसी के साथ मंगलवार को फंसे हुए मजदूरों को बचाने के बाद, उन्हें तुरंत मेडिलक केयर के लिए अस्पताल ले जाने की तैयारी भी शुरू हो गई। श्रमिकों के लिए सिल्क्यारा से लगभग 30 Km दूर चिन्यालीसौड़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 41 ऑक्सीजन सपोर्ट बेड वाला एक अलग वार्ड तैयार किया गया है।
माइक्रो टनलिंग एक्सपर्ट क्रिस कूपर ने बताया, "कल रात बहुत अच्छा हुआ। हम 50 मीटर पार कर चुके हैं। अब लगभग 5-6 मीटर की दूरी बाकी है। कल रात हमारे सामने कोई बाधा नहीं थी। ये बहुत सकारात्मक दिख रहा है।”
फंसे हुए 41 मजदूरों के परिजनों को तैयार रहने और मजदूरों के कपड़े और बैग तैयार रखने को कहा गया है। मजदूरों को रेस्क्यू कर बाहर निकालकर चिन्यालीसौड़ अस्पताल ले जाया जाएगा।
सुरंग के बाहर की सड़क की सड़क मरम्मत की जार रही थी, क्योंकि पिछले एक पखवाड़े में भारी वाहनों की नियमित आवाजाही के कारण ये रास्ता ऊबड़-खाबड़ हो गया था। एम्बुलेंस की सुचारू आवाजाही के लिए मिट्टी की एक नई परत बिछाई गई।
मजदूरों के बाहर आते है एक्शन लें सुरक्षा कर्मी
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सुरंग के बाहर सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिया कि जैसे ही मजदूर तैयार किए जा रहे रनवे रूट से बाहर आना शुरू करें, वे तुरंत कार्रवाई में जुट जाएं।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को कहा कि सिल्कयारा सुरंग में मलबे के माध्यम से 52 मीटर तक पाइप डाले गए हैं, क्योंकि वहां फंसे 41 श्रमिकों को बचाने के प्रयास 17वें दिन भी जारी हैं। उन्होंने सिल्क्यारा में संवाददाताओं से कहा, सफलता बिंदु 57 मीटर है।
बचावकर्मियों को श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए रैट-होल ड्रिलिंग तकनीक का इस्तेमाल करके लगभग 10 मीटर मलबे को खोदना होगा। ये ड्रिलिंग पहले एक बड़ी ऑगर मशीन से की गई थी, जो शुक्रवार को करीब 47 मीटर नीचे मलबे में फंस गई थी।
श्रमिकों की एक कुशल टीम ने सोमवार को रैट-होल माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल करके हाथ से गंदगी को हटाना शुरू कर दिया था, जबकि 800 mm डायमीटर वाले पाइपों को एक ऑगर मशीन मलबे के जरिए धकेल रही है।