अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहता है, तो भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव की पड़ताल करने वाले वाला पहला देश बन जाएगा। इस प्रोजेक्ट के दो अहम कॉम्पोनेंट में प्रॉपल्शन मॉड्यूल (Propulsion Module) और लैंडर मॉड्यूल (Lander Module) शामिल हैं। प्रॉपल्शन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल को चंद्रमा की कक्षा में ले जाएगा और पृथ्वी से जुड़ी मेट्रिक का मेजरमेंट लेगा।
भारतीय वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के नाम पर इस लैंडर मॉड्यूल का नाम रखा गया है। विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है। विक्रम लैंडर का काम प्रज्ञान रोवर को अपने साथ ले जाकर इसे चांद की सतह पर उतारना है।
सॉफ्ट लैंडिंग पूरी हो जाने के बाद विक्रम लैंडर रैंप का इस्तेमाल कर प्रज्ञान रोवर को चांद की सतह पर उतारेगा। विक्रम का मिशन एक चांद दिवस यानी पृथ्वी के हिसाब से 14 दिनों का है। इसका वजन 1749.86 किलोग्राम है। इसके पेलोड में रेडियो बाउंड हाइपरसेंसिटिव आइनोस्फीयिर एंड एटमोस्टफियर(RAMBHA) इंस्ट्रूमेंट शामिल है, जिसका इस्तेमाल सैटलाइट के आयन और इलेक्ट्रॉन की डेन्सिटी मापने में किया जाएगा।
विक्रम लैंडर में नासा (NASA) का लेजर रेट्रोफ्लेक्टर अरै (LRA) भी मौजूद है, जो चांद की संरचना को समझने के लिए एक प्रयोग है। LRA, लैंडिंग के दौरान खतरों का पता लगाने और इससे बचाव के उपाय करने के लिए जिम्मेदार होगा। फाइनल पेलोड, अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (APXS) है, जिसका इस्तेमाल चांद की सतह पर मिट्टी और चट्टानों में मौजूद तत्वों का पता लगाने में किया जाएगा।