केंद्र सरकार ने अपने मालिकाना हक वाले एसेट्स के मॉनेटाइजेशन से 6 लाख करोड़ रुपये या लगभग 81 अरब डॉलर जुटाने की योजना बनाई है। इन एसेट्स में लैंड, रोड्स, स्टेडियम शामिल हैं। इसका सबसे आसान तरीका इन्हें बेचना है लेकिन यह हमेशा एक अच्छा समाधान नहीं होता।
उदाहरण के लिए, रोड के एक हिस्से को बेचने में मुश्किल हो सकती है। अगर आप राष्ट्रीय राजमार्गो को प्राइवेटाइज करते हैं तो इससे बहुत से लोगों को असुविधा हो सकती है।
अधिकतर सरकारी एसेट्स, विशेषतौर पर सरकार के मालिकाना हक वाली कंपनियों पर कर्ज है और इन्हें खरीदने में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी नहीं होगी।
इसका विकल्प ऐसे कुछ वैल्यू रखने वाले एसेट्स को चुनना और उन्हें पूरी तरह बेचे बिना मॉनेटाइज करना हो सकता है।
इसके लिए रोड्स का उदाहरण लिया जा सकता है। किसी रोड को पूरी तरह बेचने के बजाय उससे टोल वसूलने के राइट्स किसी प्राइवेट फर्म को ट्रांसफर किए जा सकते हैं जिसे रोड का मेंटेनेंस भी करना होगा। इसके एग्रीमेंट में टोल की फीस, राइट्स को देने की अवधि और अन्य महत्वपूर्ण विवरणों को तय किया जा सकता है। इसके बदले में प्राइवेट फर्म को एकमुश्त नकद भुगतान देना होगा।
इससे सरकार को फंड मिलेगा और रोड को मेंटेन करने का झंझट भी नहीं रहेगा।
सरकारी एसेट्स को मॉनेटाइज करने के जरिए यही करने का इरादा है। इन एसेट्स से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लगाया जा सकता है। इसमें यह प्रश्न उठता है कि सरकार किन एसेट्स को मॉनेटाइज कर सकती है।
इनमें पावर ट्रांसमिशन एस्ट्स और InvIT हो सकते हैं। InvIT एक जटिल फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट की तरह लगते हैं लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। सरकार चुनिंदा पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स को एक ट्रस्ट में रख सकती है। इसके बाद इस ट्रस्ट की यूनिट्स संभावित इनवेस्टर्स को बेची जा सकती हैं।
अगर आपके पास भी निवेश के लिए रकम है तो आप इन यूनिट्स में से एक खरीद सकते हैं और आपको वर्ष के अंत में डिविडेंड का फायदा मिल सकता है। यह एक IPO की तरह है लेकिन इस मामले में इनवेस्टर्स को इन पावर ट्रांसमिशन एसेट्स से रेवेन्यू मिलने पर कुछ कैश प्राप्त होगा। सरकार को इससे शुरुआत में ही एकमुश्त रकम मिल जाएगी।
यह सभी पक्षों के लिए अच्छा सौदा है और इसमें एसेट की बिक्री भी नहीं की जा रही।
सरकार के पास देश भर में लैंड, गेस्ट हाउस और अन्य रियल एस्टेट एसेट्स मौजूद हैं जिनका अच्छा इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसमें एक बड़ी मुश्किल उन एसेट्स को तय करने की है जिन्हें मॉनेटाइज किया जाना है। इसके साथ ही मॉनेटाइज करने का तरीका भी महत्वपूर्ण होगा।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार होता है तो सरकार को रोड्स से 1.6 लाख करोड़ रुपये, रेलवे एसेट्स से 1.5 लाख करोड़ रुपये, पावर सेक्टर के प्रोजेक्ट्स से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये और गैस पाइपलाइंस और टेलीकम्युनिकेशन एसेट्स से लगभग 50,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
इससे सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत होने और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।