फूड प्रोडक्ट्स और फ्यूल की महंगाई में कमी से होलसेल प्राइस इनफ्लेशन में जून में घटकर 12.07 प्रतिशत पर रही। इससे पिछले महीने यह 12.94 प्रतिशत थी। इंडस्ट्री डिपार्टमेंट की ओर से जारी डेटा से पता चलता है कि जून में फूड इनफ्लेशन घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई, जो मई में 4.2 प्रतिशत पर थी।
पेट्रोल, डीजल और कुकिंग गैस की कीमतें बढ़ने के बावजूद फ्यूल इनफ्लेशन मई में 37.6 प्रतिशत से गिरकर जून में 32.8 प्रतिशत पर आ गई।
होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) डेटा से सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) दोनों को राहत मिलेगी। सोमवार को जारी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) डेटा में भी रिटेल इनफ्लेशन कुछ घटकर 6.26 प्रतिशत पर रही थी। हालांकि, अभी भी यह RBI के इनफ्लेशन के टारगेट की ऊपरी सीमा से अधिक है।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के अगले पॉलिसी रिव्यू में इनफ्लेशन के कारण दबाव के बावजूद पॉलिसी रेट्स में बदलाव होने की संभावना कम है। इन रेट्स को बरकरार रखने से महामारी के कारण बड़ा नुकसान उठाने वाली इकोनॉमी की रिकवरी में मदद मिल सकती है।
मिनिस्ट्री का कहना था, "मॉनसून की रफ्तार अच्छी होने, दालों और एडिबल ऑयल की सप्लाई बढ़ने और राज्यों में लॉकडाउन खुलने से आगामी महीनों में कीमतों में कमी आ सकती है। हालांकि, क्रूड जैसी कमोडिटीज के वैश्विक स्तर पर महंगा होने और लॉजिस्टिक्स की कॉस्ट बढ़ने से महंगाई बढ़ने का जोखिम रहेगा।"