देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी लाइफ इंश्योरेंस ऑफ इंडिया (LIC) के IPO का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए विनिवेश (Disinvestment) के जरिये 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस साल LIC का IPO बेहद जरूरी है।
अगर LIC का IPO इस साल नहीं आता है तो सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने में बड़े अंतर से चूक जाएगी। LIC के IPO लॉन्च करने में देरी नहीं हो, इसके लिए वित्त मंत्रालय ने इसके वैल्यूएशन की प्रक्रिया को फास्ट ट्रैक कर दिया है। मंत्रालय अभी LIC के इम्बेडेड वैल्यूएशन का आकलन कर रहा है इस संबंध में रिपोर्ट 1 महीने के अंदर आने की उम्मीद है।
इस मामले से जूड़े एक अधिकारी ने कहा कि LIC का वैल्यूएशन हो जाने के बाद डिपार्टमेंट ऑफ इंवेस्टमेंट एंड पब्लिक ऐसेट मैनेजमेंट (DIPAM) मार्केट कंडीशन को देखते हुए IPO लॉन्च करने का डेट तय करेगा।
आपको बता दें कि DIPAM के सेक्रेटरी तुहिन कांता पांडेय ने कहा था कि LIC का IPO अक्टूबर, 2021 के बाद आएगा। LIC के IPO से पहले कंपनी के वैल्यूएशन के लिए एक्चुअरियल फर्म Milliman Advisor को नियुक्त किया है। जबकि, Deloitte और SBI Capital को प्री-आईपीओ एडवाइजर नियुक्त किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि LIC का वैल्यूएशन IPO के डिटेल्स तय करने के लिए बहुत जरूरी है। इसी के आदार पर तय होगा कि LIC के IPO का इश्यू साइज क्या होगा और इसके शेयर का इश्यू प्राइस क्या होगा। इससे सरकार को यह पता चलेगा कि उसे विनिवेश के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्राइमरी मार्केट में LIC के कितने इक्विटी शेयर जारी करने हैं।
LIC ने दर्जनों कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी का वैल्यूएशन करते वक्त इस सभी ऐसेट्स की वैल्यूएशन किया जाएगा। आपको बता दें कि वर्ष 2019-20 में LIC को अपनी प्रोपर्टी के रेंट से 360 करोड़ रुपये से अधिक मिले थे। वर्ष 2019-20 में LIC के टोटल ऐसेट्स की वैल्यू 31.96 लाख करोड़ रुपये थी।
आपको बता दें कि मोदी सरकार (Modi Government) कई चरणों में LIC में अपनी 25% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। पहले चरण में सरकार इसकी 10 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है। अभी के वैल्यूएशन के हिसाब से LIC में अपनी 10% हिस्सेदारी बेचने पर केंद्र सरकार को 80,000 करोड़ रुपये से 1 लाख करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं।
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