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इस साल अब तक 139 SME IPO, जानें कितने हजार करोड़ रुपये हुए हासिल

स्टॉक एक्सचेंज BSE और NSE ने साल 2012 में SME प्लेटफॉर्म लॉन्च किए थे। SME क्षेत्र की IPO लाने वाली कंपनियां मुख्य रूप से आईटी, FMCG, ऑटोमोटिव कंपोनेंट, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञापन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़ी हैं। इस साल सितंबर माह में सबसे ज्यादा 37 SME IPO आए। अगले सप्ताह 3 कंपनियों- पैरागॉन फाइन एंड स्पेशिएलिटी केमिकल, शांथला FMCG प्रोडक्ट्स और ऑन डोर कॉन्सेप्ट के IPOs आने वाले हैं।

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Oct 22, 2023 पर 1:04 PM
इस साल अब तक 139 SME IPO, जानें कितने हजार करोड़ रुपये हुए हासिल
इस साल का सबसे बड़ा SME IPO स्पेक्ट्रम टैलेंट मैनेजमेंट का रहा है, जिसने IPO के जरिए 105 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है।

साल 2023 स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेस (SME) के IPO के लिए अब तक काफी अच्छा रहा है। फैमिली ऑफिसेज के साथ-साथ उच्च नेटवर्थ वाले व्यक्तियों (HNIs) की मजबूत भागीदारी, बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी और निवेशकों की सकारात्मक धारणा के चलते ऐसा हुआ। इस साल अब तक 139 SME ने IPO के जरिए 3,540 करोड़ रुपये जुटाए हैं। प्राइमडेटाबेस.कॉम की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। पिछले पूरे साल 2022 में 109 कंपनियों ने SME IPO से 1,875 करोड़ रुपये जुटाए थे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे भी SME IPO के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहने की उम्मीद है।

उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक कुल 139 IPOs ने SME प्लेटफॉर्म्स- BSE SME और NSE Emerge पर शुरुआत की। इस साल 20 अक्टूबर तक विभिन्न कंपनियों ने SME IPOs के जरिए कुल 3,540 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है। इसके अलावा अगले सप्ताह 3 कंपनियों- पैरागॉन फाइन एंड स्पेशिएलिटी केमिकल, शांथला FMCG प्रोडक्ट्स और ऑन डोर कॉन्सेप्ट के IPOs आने वाले हैं।

किन सेक्टर्स से हैं IPO लाने वाले ज्यादातर SME

SME क्षेत्र की IPO लाने वाली कंपनियां मुख्य रूप से आईटी, FMCG, ऑटोमोटिव कंपोनेंट, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञापन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़ी हैं। इन कंपनियों ने विस्तार, कार्यशील पूंजी की जरूरत को पूरा करने और कर्ज चुकाने के लिए यह राशि जुटाई है। एनालिस्ट्स का मानना है कि SME की फंड रेजिंग में बड़े उछाल के पीछे मुख्य रूप से फैमिली ऑफिसेज और HNIs की भागीदारी को माना जा सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि फंड जुटाने की गतिविधियों में बाजार में तेजी की वजह से बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा बाजार में नकदी की स्थिति भी अच्छी है और कंपनियां अपना कारोबार बढ़ा रही हे। ऐसे में पूंजी की भारी मांग बनी हुई है।

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