Afcons Infra IPO: शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप ने अपने लेंडर्स से कुछ शर्तों में छूट देने की मांग की है जिससे वे एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) को आगे बढ़ सके। कंपनी ने 5 अक्टूबर को लेंडर्स को भेजे गए एक लेटर में यह छूट मांगी है। मनीकंट्रोल ने इस नोटिस की एक कॉपी देखी है।
इससे पहले जून 2023 में, शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप की कंपनी गोस्वामी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड (GIPL) ने निवेशकों के एक समूह से रुपये में जीरो कूपन वाले नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (NCD) के जरिए 14,300 करोड़ रुपये जुटाए थे। जिन निवेशकों से यह रकम जुटाई गई, उसमें सेर्बेरस कैपिटल, वर्डे पार्टनर्स, कैन्यन कैपिटल, डेविडसन केम्पनर, साथ ही ड्यूश बैंक, एडलवाइस स्पेशल ऑपर्च्युनिटीज फंड और एरेस SSG जैसे मौजूदा लेंडर्स शामिल हैं। GIPL के इन NCD धारकों से छूट मांगी जा रही है।
अब मामला यह है कि एफकॉन्स के IPO और प्री-आईपीओ में जिन शेयरों को बिक्री के लिए रखा जाएगा, उनमें GIPL के पास मौजूद कंपनी के शेयर भी शामिल हैं। ऐसे में SP ग्रुप को इन शेयरों को बेचने के लिए लेंडर्स की जरूरत है।
मनीकंट्रोल ने 1 अक्टूबर को बताया था कि SP ग्रुप ने एफकॉन्स के आईपीओ के लिए अपनी योजना में बदलाव किया है। अब, यह प्री-IPO दौर में 4,000 करोड़ रुपये और IPO में लगभग 4,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहा है। पहले सिर्फ IPO के जरिए 7,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना थी।
5 अक्टूबर को ऋणदाताओं को भेजे गए नोटिस के अनुसार, ऋणदाताओं से मांगी गई छूटों में प्री-आईपीओ दौर और आईपीओ में बेचे जाने वाले शेयरों पर गिरवी रखी गई राशि को हटाना, शेयरों को जिस कीमत पर बेचा जाएगा, उसका खुलासा करने की आवश्यकता आदि शामिल हैं।
शेयर गिरवी रखने की शर्तों से छूट
कंपनी ने लेंडर्स से अनुरोध किया है कि प्री-IPO और IPO में बेचे जाने वाले एफकॉन्स इक्विटी शेयरों पर रखी गई गिरवी को हटाने की अनुमति दी जाए। इसके अलावा, शेयरों की बिक्री के लिए कीमत का खुलासा करने की शर्त से भी छूट मांगी गई है क्योंकि SEBI के नियमों के तहत आईपीओ का प्राइस रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल करने के बाद ही बताई जा सकती है।
एफकॉन्स के IPO में GIPL की ओर से बेचे जाने वाले शेयरों के अलावा, ₹1,250 करोड़ का प्राइमरी फंडरेज भी शामिल होगा। इसमें से ₹500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज को चुकाने, ₹150 करोड़ कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की खरीद के लिए, और ₹300 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
SP ग्रुप के पास फिलहाल GIPL और दूसरी ग्रुप की कंपनियों के जरिए एफकॉन्स इंफ्रा में 97.11% हिस्सेदारी है।