boAt ने IPO के लिए SEBI के पास दोबारा किया अप्लाई, इस बार अलग है तरीका

इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड boAt की पैरेंट कंपनी Imagine Marketing ने दोबारा IPO की तैयारी शुरू की है। इस बार कंपनी ने SEBI के पास confidential pre-filing रूट से दस्तावेज जमा किए हैं। आइए जानते हैं पूरी डिटेल।

अपडेटेड Apr 08, 2025 पर 5:17 PM
अमन गुप्ता और समीर मेहता ने 2013 में Imagine Marketing की नींव रखी थी।

boAt IPO: इलेक्ट्रॉनिक्स और लाइफस्टाइल ब्रांड boAt की मालिक कंपनी Imagine Marketing Ltd ने 8 अप्रैल को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपने आईपीओ (IPO) के लिए कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग रूट के तहत दस्तावेज दाखिल किए हैं।

यह तरीका कंपनियों को इस बात की आजादी देता है कि वे अपने Draft Red Herring Prospectus (DRHP) की जानकारी शुरुआती चरणों में सार्वजनिक न करें। इसका मतलब है कि कंपनी IPO लाने की तैयारी कर सकती है, लेकिन खुलासा पूरी तैयारी के बाद ही करती हैं।

दूसरी बार किस्मत आजमा रही है कंपनी


यह Imagine Marketing का दूसरा प्रयास है। इससे पहले जनवरी 2022 में कंपनी ने करीब ₹2,000 करोड़ के IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे। इसमें ₹900 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹1,100 करोड़ का Offer for Sale (OFS) शामिल था। हालांकि, वह पेशकश आगे नहीं बढ़ पाई थी।

कंपनी ने साफ किया है कि प्री-फाइलिंग करने का मतलब यह नहीं है कि वह IPO जरूर लाएगी। यह महज एक तैयारी का कदम है। इससे कंपनी को बाजार की स्थिति को समझने और रणनीति बदलने की छूट मिलती है।

Imagine Marketing क्या करती है?

अमन गुप्ता और समीर मेहता ने 2013 में Imagine Marketing की नींव रखी थी। यह देश की सबसे चर्चित कंज्यूमर टेक कंपनियों में से एक है। इसकी प्रोडक्ट रेंज में ऑडियो डिवाइसेज, स्मार्ट वियरेबल्स, पर्सनल ग्रूमिंग प्रोडक्ट्स और मोबाइल एक्सेसरीज शामिल हैं। ब्रांड boAt ने युवा वर्ग में खासा नाम कमाया है।

कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग रूट ही क्यों?

इस रूट का इस्तेमाल करने वाली Imagine Marketing अकेली नहीं है। हाल ही में Tata Capital और PhysicsWallah जैसे बड़े नाम भी इसी रूट से IPO फाइल कर चुके हैं। 2024 में Swiggy और Vishal Mega Mart ने भी इसी रास्ते से IPO लॉन्च किए।

इस ट्रेंड की शुरुआत Tata Play (पहले Tata Sky) ने 2022 में की थी, लेकिन बाद में उन्होंने पब्लिक ऑफर को टाल दिया।

क्या फायदे हैं इस रूट के?

  • एक्सपर्ट के मुताबिक, गोपनीय फाइलिंग कंपनियों को ज्यादा लचीलापन देती है।
  • पारंपरिक रूट में SEBI की मंजूरी के 12 महीनों के अंदर IPO लाना जरूरी होता है।
  • प्री-फाइलिंग रूट में यह समयसीमा 18 महीने तक बढ़ जाती है।
  • कंपनियां अपने इश्यू साइज को UDRHP स्टेज तक 50% तक बदल सकती हैं।
  • इससे कंपनियों को बाजार के हिसाब से फैसला लेने में मदद मिलती है।

यह भी पढ़ें : Market outlook : बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 9 अप्रैल को कैसी रह सकती है इसकी चाल

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।