हुंडई मोटर का आईपीओ निवेश के लिए खुल गया है। 27,870 करोड़ रुपये का यह इंडिया का सबसे बड़ा आईपीओ है। इससे पहले सबसे बड़ा आईपीओ का रिकॉर्ड एलआईसी के नाम था। हुंडई के आईपीओ की काफी चर्चा हो रही है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनी ने आईपीओ में शेयर की कीमत ज्यादा रखी है। मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब जानने के लिए हुंडई के मैनेजमेंट से बात की। उनसे कंपनी के फ्यूचर प्लान, इंडियन ऑटो मार्केट की संभावनाओं सहित कई मसलों पर बातचीत की।
वैल्यूएशन बैंकर्स ने तय किए हैं
आईपीओ में शेयर की कीमत महंगा होने के सवाल पर कंपनी के मैनेजमेंट ने कहा कि वैल्यूएशन को हमने बैंकर्स पर छोड़ा था। कंपनी के लिए स्ट्रेटेजी और परफॉर्मेंस ज्यादा अहम है। 2024 में कंपनी का रेवेन्यू 70,000 करोड़ रुपये रहा। EBITDA ग्रोथ 13 फीसदी रही। हमने लगातार वैल्यू डिलीवर की है। अगर इंडिया में हुंडई (Hyundai Motor) के इतिहास को देखा जायए तो कंपनी ने हमेशा शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड दिया है। आगे कंपनी पूंजीगत खर्च, कैश फ्लो और इंडस्ट्री बेस्ट प्रैक्टिसेज के आधार पर फैसले लेगी। FY25 खत्म होने के बाद कंपनी डिविडेंड पॉलिसी की समीक्षा करेगी।
इंडियन मार्केट में 26 साल से ज्यादा समय से है हुंडई
हुंडई के मैनेजमेंट ने कहा कि कंपनी को इंडिया में 26 साल से ज्यादा हो चुके हैं। कंपनी ने हमेशा मार्केट और ग्राहकों को सम्मान देने में भरोसा किया है। कंपनी ने हमेशा इंडिया को ध्यान में रख प्रोडक्ट्स पेश किए हैं। इंडियन ऑटो मार्केट में ग्रोथ की संभावनाओं के बारे में मैनेजमेंट ने कहा कि इंडियन ऑटो इंडस्ट्री की ग्रोथ 5 फीसदी (सीएजीआर) रही है। क्रिसिल ने भी अगले पांच साल में 4.5 से 6 फीसदी ग्रोथ का अनुमान जताया है। अभी कंपनी की क्षमता 8,24,000 यूनिट्स की है। FY25 की दूसरी छमाही में पुणे प्लांट का पहला फेज चालू हो जाएगा। इससे क्षमता 1.7 लाख बढ़ जाएगी। उसके बाद 2028 में अतिरिक्त 80,000 यूनिट्स का इजाफा होगा। तब कुल क्षमता 1.1 अरब हो जाएगी, जो अभी से करीब 30 फीसदी ज्यादा होगी।
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कंपनी का सेफ्टी पर ज्यादा फोकस
फ्यूचर प्लान के बारे में पूछने पर मैनेजमेंट ने कहा कि कंपनी नए मॉडल्स, नई टेक्नोलॉजी, ईवी आदि पर फोकस बढ़ा रही है। आगे सॉफ्टवेयर डिफाइंड व्हीकल्स और इंफोटेनमेंट ज्यादा लोकप्रिय साबित होंगे। कंपनी ने एडवान्स्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) की शुरुआत की है। आज हुंडई के हर 13 मॉडल्स में 8 में एडीएएस लगा है। हमारा फोकस सेफ्टी पर है। इंडियन ऑटो मार्केट में तेजी से बदलाव आ रहा है। 2015 में इस मार्केट में हैचबैक पर फोकस था। SUV की हिस्सेदारी कुल बिक्री में सिर्फ 13 फीसदी थी। आज कुल सेल्स में एसयूवी की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा हो गई है।